मजरूह सुल्तानपुरी की इन पंक्तियों से शुरुआत करता हूँ कि मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर | लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया || हम कुछ दोस्तों ने कुछ ही बरस पहले बिहार को विश्वपटल पर प्रभावी ढंग से रखने की कोशिश हेतु सोशल मीडिया के फेसबुक पर एक पेज की शुरुआत की थी | हमने बिहार और बिहार से जुडी बहुत सारे मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया और हमें संस्थाओं ने ध्यान से सुना भी और सराहना भी की हमारे प्रयासों की| ये शुरुआत थी उस कारवां के बनने की | हमने बहुत कठिनाइयों का सामना नहीं किया क्यूंकि आप हमारे साथ थे, देखते ही देखते आपने हमारे पेज को नई ऊंचाइयों पर पहुचाया जब फेसबुक लाइक की गिनती हज़ार से दस हज़ार, लाख से दो लाख में हुयी और आज भी ये सिलसिला अनवरत जारी है| इन बीते वर्षों में हमने आपके साथ जो यात्रा की है उस अद्भुत संस्मरण के लिए कोटिशः धन्यवाद |

मित्रों आपके स्नेह और साथ के बल पर हम एक नई शुरुआत करने जा रहे हैं,आज वक़्त है इस कारवाँ को एक और मुकाम देने का, जब हम अपनी चौपाल जमाएंगे आपके साथ हमारी नई पोर्टल बिहार चौपाल के आँगन में| हमारी धरती दिनकर, बेनीपुरी, रेणु, विद्यापति, भिखारी ठाकुर जैसी पुरोधाओं की जननी रही है, और ऐसे ही कितने धुरंधर हमारी माटी में छिपे हैं जिन्हें मंच उपलब्ध करना हमारी जिम्मेदारी बनती है| कहते हैं बिहार भारत की राजनैतिक प्रयोगशाला है, चंपारण आन्दोलन से लेकर सम्पूर्ण क्रांति तक जाने कितने समर्थ राजनैतिक पुरोधा इस धरती की कोख से आये किन्तु आज भी न जाने कितने ही चाणक्य वंचित है तक्षशिला में प्रवेश से |
क्यूँ न हम और आप तराशें इन चाणक्यों को जो इस देश को दिशा देकर फिर से एक सूत्र में पिरो सकें| ये पोर्टल एक मंच बने जहाँ हम आप सुनें सुनायें, चर्चा करें सशक्त बिहार के वैभवशाली इतिहास को दोहराने की जरूरतों पर |
देव धन्वंतरी के जन्मदिवस कार्तिक त्रियोदशी “धनतेरस” के शुभ दिन आप सब के आशीर्वादों व स्नेह की अभिलाषा के साथ हम “बिहार चौपाल” पोर्टल का श्री गणेश कर रहे हैं। आशा है आपका निरंतर सहयोग, सकारात्मक विचार व स्वस्थ आलोचना से ये मंच लाभान्वित होता रहेगा।
—-संचालन मंडली

 

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