⛅ *दिनांक 11 जनवरी 2018*
⛅ *दिन – गुरुवार*
⛅ *विक्रम संवत – 2074*
⛅ *शक संवत -1939*
⛅ *अयन – दक्षिणायण*
⛅ *ऋतु – शिशिर*
⛅ *गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार मास – पौष*
⛅ *मास – माघ*
⛅ *पक्ष – कृष्ण*
⛅ *तिथि – दशमी शाम 07:10 तक तत्पश्चात एकादशी*
⛅ *नक्षत्र – विशाखा पूर्ण रात्रि*
⛅ *योग – शूल 12 जनवरी प्रातः 05:35 तक तत्पश्चात गण्ड*
⛅ *राहुकाल – दोपहर 02:07 से शाम 03:28 तक*
⛅ *सूर्योदय – 07:19*
⛅ *सूर्यास्त – 18:13*
⛅ *दिशाशूल – दक्षिण दिशा में*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *षटतिला एकादशी* 🌷
➡ *11 जनवरी 2018 गुरुवार को शाम 07:11 से 12 जनवरी 2018 शुक्रवार को रात्रि 09:22 तक एकादशी है ।*
💥 *विशेष – 12 जनवरी 2018 शुक्रवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखें ।*
➡ *इन 6 कामों में करें तिल का उपयोग*
🙏🏻 *षटतिला एकादशी व्रत में तिल का छ: रूपों में उपयोग करना उत्तम फलदाई माना जाता है। जो व्यक्ति जितने रूपों में तिल का उपयोग तथा दान करता है, उसे उतने हजार वर्ष तक स्वर्ग में स्थान प्राप्त होता है। षटतिला एकादशी पर 6 प्रकार से तिल के उपयोग तथा दान की बात कही है, वह इस प्रकार है-*
🌷 *तिलस्नायी तिलोद्वार्ती तिलहोमी तिलोद्की।*
*तिलभुक् तिलदाता च षट्तिला: पापनाशना:।।*
➡ *अर्थात- इस दिन तिलों के जल से स्नान, तिल का उबटन, तिल से हवन, तिल मिले जल को पीने, तिल का भोजन तथा तिल का दान करने से समस्त पापों का नाश हो जाता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, षटतिला एकादशी के दिन हमें पद्मपुराण के ही एक अंश का श्रवण और ध्यान करना चाहिए। इस दिन काले तिल व काली गाय दान करने का विशेष महत्व है।*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *षट्तिला एकादशी* 🌷
🙏🏻 *स्नान, उबटन जिसमे जौ और तिल पड़ा हो | जौ डाला हुआ पानी पीना, तिल डाला हुआ पानी लेना, तिल मिश्रित भोजन करना, तिल का दान करना, तिल का होम करना ये पापनाशक प्रयोग है |
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *एकादशी के दिन करने योग्य* 🌷
🙏🏻 *एकादशी को दिया जला के विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें …….विष्णु सहस्त्र नाम नहीं हो तो १० माला गुरुमंत्र का जप कर लें l अगर घर में झगडे होते हों, तो झगड़े शांत हों जायें ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें तो घर के झगड़े भी शांत होंगे l
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *एकादशी के दिन ये सावधानी रहे* 🌷
🙏🏻 *महीने में १५-१५ दिन में एकादशी आती है एकादशी का व्रत पाप और रोगों को स्वाहा कर देता है लेकिन वृद्ध, बालक और बीमार व्यक्ति एकादशी न रख सके तभी भी उनको चावल का तो त्याग करना चाहिए एकादशी के दिन चावल खाता है… तो धार्मिक ग्रन्थ से एक एक चावल एक एक कीड़ा खाने का पाप लगता है…ऐसा डोंगरे जी महाराज के भागवत में डोंगरे जी महाराज ने कहा।

।।ॐ श्री हरि।।

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