⛅ *दिनांक 14 जनवरी 2018*
⛅ *दिन – रविवार*
⛅ *विक्रम संवत – 2074*
⛅ *शक संवत -1939*
⛅ *अयन – उत्तरायण*
⛅ *ऋतु – शिशिर*
⛅ *गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार मास – पौष*
⛅ *मास – माघ*
⛅ *पक्ष – कृष्ण*
⛅ *तिथि – त्रयोदशी रात्रि 02:30 तक तत्पश्चात चतुर्दशी*
⛅ *नक्षत्र – ज्येष्ठा दोपहर 01:15 तक तत्पश्चात मूल*
⛅ *योग – ध्रुव पूर्ण रात्रि तक*
⛅ *राहुकाल – शाम 04:51 से शाम 06:13*
⛅ *सूर्योदय – 07:19*
⛅ *सूर्यास्त – 18:15*
⛅ *दिशाशूल – पश्चिम दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण – मंकर संक्रांति (पुण्यकाल दोपहर 01:47 से सूर्यास्त तक), प्रदोष व्रत*
💥 *विशेष – त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *मंकर संक्रांति* 🌷
➡ *मकर संक्रांति, रविवार (14 जनवरी 2018) को है ।*
🙏🏻 *भविष्यपुराण, ब्राह्मपर्व, अध्याय 90 के अनुसार*
*रविसङ्क्रमणे यः स्याद्रवेर्वारो गणाधिप ।*
*स ज्ञेयो हृदयो नाम आदित्यहदयप्रियः । । १*
*तत्र नक्तं समाश्रित्य देवं सम्पूज्य भक्तितः ।*
*गत्वा च सदने भानोरादित्याभिमुखस्थितः । । २*
*जपेदादित्यहदयं सङ्ख्ययाष्टशतं बुधः ।*
*अथ वास्तमनं यावद्भास्करं चिंतयेद्धृदि । । ३*
*गृहमेत्य ततो विप्रान्भोजयेच्छक्तितः शिव ।*
*भुक्त्वा तु पायसं वीर ततो भूमौ स्वपेद्बुधः । । ४*
*योऽत्र सम्पूयेद्भानुं भक्त्या श्रद्धासमन्वितः ।*
*स कामाँल्लभते सर्वान्भास्कराद्धृदयस्थितान् । । ५*
*तेजसा यशसा तुल्यः प्रभयैषां महात्मनः ।*
*शक्रगोपाण्डजानां तु गोपतेर्गोवृषेक्षण । । ६*
🙏🏻 *संक्रांति के दिन यदि रविवार हो तो उसका नाम हृदयवार होता है | वह आदित्य के ह्रदय को अत्यंत प्रिय है | उस दिन नक्तव्रत करके मंदिर में सूर्यनारायण के अभिमुख एक सौ आठ बार आदित्यहृदयस्तोत्र का पाठ करना चाहिये अथवा सायंकाल तक भगवान् सूर्य का ह्रदय में ध्यान करना चाहिये | सूर्यास्त होने के पश्च्यात घर आकर यथाशक्ति ब्राह्मण को भोजन कराये तथा मौनपूर्वक स्वयं भी खीर का भोजन करके सूर्यदेव का स्मरण करते हुए भूमिपर ही शयन करे | इसप्रकार जो इस दिन व्रत रहकर श्रद्धा-भक्ति से सूर्यनारायण की पूजा करता है, उसके समस्त अभीष्ट सिद्ध हो जाते है और वह भगवान् सूर्य के समान ही तेज-कान्ति तथा यश को प्राप्त करता है |*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *मकर संक्रांति* 🌷
🙏🏻 *भविष्यपुराण, मध्यमपर्व के अनुसार मकर संक्रांति तथा उत्तरायण के अवसर पर पिता, माता तथा गुरु का विशेष मंत्र से चरणवंदन करने से सभी तीर्थों का फल स्वतः ही मिल जाएगा।*
🙏🏻 *यह मंत्र है*
*स्वर्गापवर्गप्रदमेकमाद्यं ब्रह्मस्वरूपं पितरं नमामि |*
*यतो जगत पश्यति चारुरुपं तं तर्पयाम: सलि लैस्तिलैर्युतै: ||*
*पितरो जनयन्तिह पितर: पालयन्ति च |*
*पितरो ब्रह्मरूपा हि तेभ्यो नित्यं नमो नम: ||*
*यस्माद्वीजयते लोकस्तस्माद्धर्म” प्रवर्तते |*
*नमस्तुभ्यं पित: साक्षाद्ब्रह्मरूप नमोस्तु ते ||*
*या कुर्रक्षविवरे कृत्वा स्वयं रक्षति सर्वत: |*
*नमामि जननीं देवीं परा प्रकृतिरूपिणिम ||*
*कृच्छ्रेण महता देव्या धारितोsहं यथोदरे |*
*त्वलप्रसादाज्जगददुष्ठं मातर्नित्यं नमोस्तु ते ||*
*पृथिव्या यानि तीर्थानि साग्रादीनि सर्वश: |*
*वसन्ति यत्र तो नैमि मातरं भूतिहेतवे ||*
*गुरुदेवप्रसादेन लब्धा विद्या यशस्करी |*
*शिवरूप नमस्तस्मै संसारार्णवसेतवे ||*
*वेद्वेदांगशास्त्राणां तत्वं यत्र प्रतिष्ठितम |*
*आधार: सर्वभूतानामप्रजन्मनं नमोस्तु ते ||*
*ब्राह्मणों जगतां तीर्थ पावनं परमं यत: |*
*भूदेव हर में पापं विष्णुरुपिन नमोस्तु ते ||*
।।ॐ श्री हरि।।

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