⛅ *दिनांक 22 जनवरी 2018*
⛅ *दिन – सोमवार*
⛅ *विक्रम संवत – 2074*
⛅ *शक संवत -1939*
⛅ *अयन – उत्तरायण*
⛅ *ऋतु – शिशिर*
⛅ *मास – माघ*
⛅ *पक्ष – शुक्ल*
⛅ *तिथि – पंचमी शाम 04:24 तक तत्पश्चात षष्ठी*
⛅ *नक्षत्र – उत्तर भाद्रपद पूर्ण रात्रि तक*
⛅ *योग – परिघ सुबह 10:52 तक तत्पश्चात शिव*
⛅ *राहुकाल – सुबह 08:44 से सुबह 10:06 तक*
⛅ *सूर्योदय – 07:19*
⛅ *सूर्यास्त – 18:21*
⛅ *दिशाशूल – पूर्व दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण –
💥 *विशेष – पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *रथ सप्तमी* 🌷
➡ *24 जनवरी 2018, माघ शुक्ल सप्तमी, बुधवार, रेवती नक्षत्र 08:35 तक तत्पश्च्यात अश्वनी नक्षत्र*
👉🏻 *स्नान मुहूर्त = 05:28 से 07:16*
🙏🏻 *माघ शुक्ल सप्तमी को अचला सप्तमी, रथ सप्तमी, आरोग्य सप्तमी, भानु सप्तमी, अर्क सप्तमी आदि अनेक नामों से सम्बोधित किया गया है और इसे सूर्य की उपासना के लिए बहुत ही सुन्दर दिन कहा गया है। पुत्र प्राप्ति, पुत्र रक्षा तथा पुत्र अभ्युदय के लिए इस दिन संतान सप्तमी का व्रत भी किया जाता है।*
🙏🏻 *स्कन्द पुराण अनुसार*
*यस्यां तिथौ रथं पूर्वं प्राप देवो दिवाकरः॥सा तिथिः कथिता विप्रैर्माघे या रथसप्तमी॥ ५.१२९ ॥*
*तस्यां दत्तं हुतं चेष्टं सर्वमेवाक्षयं मतम्॥ सर्वदारिद्र्यशमनं भास्करप्रीतये मतम्॥ ५.१३० ॥*
🙏🏻 *भगवान सूर्य जिस तिथि को पहले-पहल रथ पर आरूढ़ हुए, वह ब्राह्मणों द्वारा माघ मास की सप्तमी बताई गयी है, जिसे रथसप्तमी कहते हैं। उस तिथि को दिया हुआ दान और किया हुआ यज्ञ सब अक्षय माना जाता है। वह सब प्रकार की दरिद्रता को दूर करने वाला और भगवान सूर्य की प्रसन्नता का साधक बताया गया है।*
🙏🏻 *भविष्य पुराण के अनुसार सप्तमी तिथि को भगवान् सूर्य का आविर्भाव हुआ था | ये अंड के साथ उत्पन्न हुए और अंड में रहते हुए ही उन्होंने वृद्धि प्राप्त कि | बहुत दिनोंतक अंड में रहने के कारण ये ‘मार्तण्ड’ के नामसे प्रसिद्ध हुए |*
🙏🏻 *भविष्य पुराण के अनुसार ही सूर्य को अपनी भार्या उत्तरकुरु में सप्तमी तिथि के दिन प्राप्त हुई, उन्हें दिव्य रूप सप्तमी तिथि को ही मिला तथा संताने भी इसी तिथि को प्राप्त हुई, अत: सप्तमी तिथि भगवान् सूर्य को अतिशय प्रिय हैं |*
🙏🏻 *भविष्य पुराण : श्रीकृष्ण उवाच ॥ शुक्लपक्षे तु सप्तम्यां यदादित्यदिनं भवेत् । सप्तमी विजया नाम तव्र दत्तं महाफलम् ॥*
*स्त्रांन दानं जपो होम उपवासस्तथैव च । सर्वें विजयसप्तम्पां महापातकनाशनम् ॥*
*प्रदक्षिणां यः कुरुते फलैः पुष्पौर्दिवाकरम् । स सर्वगुणसंपन्नं पुव्रं प्राप्नोत्यनुत्तमम ॥*
🙏🏻 *भगवान श्रकृष्ण कहते है– राजन! शुक्ल पक्षकी सप्तमी तिथि को यदि आदित्यवार (रविवार) हो तो उसे विजय सप्तमी कहते है. वह सभी पापोका विनाश करने वाली है .उस दिन किया हुआ स्नान ,दान्, जप, होम तथा उपवास आदि कर्म अनन्त फलदायक होता है. जो उस दिन फल् पुष्प आदि लेकर भगवान सूर्यकी प्रदक्षिणा करता है। वह सर्व गुण सम्पन्न उत्तम पुत्र को प्राप्त करता है।*
🙏🏻 *नारद पुराण में माघ शुक्ल सप्तमी को “अचला व्रत” बताया गया है। यह “त्रिलोचन जयन्ती” है। इसी को रथसप्तमी कहते हैं। यही “भास्कर सप्तमी” भी कहलाती है, जो करोङों सूर्य-ग्रहणों के समान है। इसमें अरूणोदय के समय स्नान किया जाता है। आक और बेर के सात-सात पत्ते सिर पर रखकर स्नान करना चाहिए। इससे सात जन्मों के पापों का नाश होता है। इसी सप्तमी को ‘’पुत्रदायक ” व्रत भी बताया गया है। स्वयं भगवान सूर्य ने कहा है – ‘जो माघ शुक्ल सप्तमी को विधिपूर्वक मेरी पूजा करेगा, उसपर अधिक संतुष्ट होकर मैं अपने अंश से उन्सका पुत्र होऊंगा’। इसलिये उस दिन इन्द्रियसंयमपूर्वक दिन-रात उपवास करे और दूसरे दिन होम करके ब्राह्मणों को दही, भात, दूध और खीर आदि भोजन करावें।*
🙏🏻 *शिव पुराण के अनुसार रविवारी सप्तमी सूर्यग्रहण के बराबर फल देती है और इनमें किया गया जप-ध्यान, स्नान , दान व श्राद्ध अक्षय होता है ।*
🙏🏻 *अग्नि पुराण में अग्निदेव कहते हैं – माघ मासके शुक्लपक्ष की सप्तमी तिथिको (अष्टदल अथवा द्वादशदल) कमल का निर्माण करके उसमें भगवान् सूर्यका पूजन करना चाहिये | इससे मनुष्य शोकरहित हो जाता है |*
🌷 *चंद्रिका में विष्णु ने लिखा है “सूर्यग्रहणतुल्या हि शुक्ला माघस्य सप्तमी। अरुणोदगयवेलायां तस्यां स्नानं महाफलम्॥”*
🙏🏻 *अर्थात माघ शुक्ल सप्तमी सूर्यग्रहण के तुल्य होती है सूर्योदय के समय इसमें स्नान का महाफल होता है ।*
🙏🏻 *नारद पुराण के अनुसार* 🌷 *“अरुणोदयवालायां शुक्ला माघस्य सप्तमी ॥ प्रयागे यदि लभ्येत सहस्रार्कग्रहैः समा॥* *अयने कोटिपुण्यं स्याल्लक्षं तु विषुवे फलम् ॥११२॥”*
*चंद्रिका में भी विष्णु ने लिखा है “अरुणोदयवेलायां शुक्ला माघस्य सप्तमी ॥ प्रयागे यदि लभ्येत कोटिसूर्यग्रहैः समा”*
🙏🏻 *अर्थात माघ शुक्ल सप्तमी यदि अरुणोदय के समय प्रयाग में प्राप्त हो जाए तो कोटि सूर्य ग्रहणों के तुल्य होती है ।*
🌷 *मदनरत्न में भविष्योत्तर पुराण का कथन है की “माघे मासि सिते पक्षे सप्तमी कोटिभास्करा। दद्यात् स्नानार्घदानाभ्यामायुरारोग्यसम्पदः॥”*
🙏🏻 *अर्थात माघ मास की शुक्लपक्ष सप्तमी कोटि सूर्यों के बराबर है उसमें सूर्य स्नान दान अर्घ्य से आयु आरोग्य सम्पदा करते हैं ।*
👉🏻 *आज क्या जरूर करें:*
🌞 *सूर्योदय से पूर्व उठकर दैनिक क्रियाओं आदि से विवृत्त हो जाएँ। शुद्ध जल से स्नान करें।*
🌞 *स्नान करने के पश्च्यात सूर्य भगवान को अर्घ्य देकर प्रणामं करें। संध्या समय भी अर्घ्य देकर प्रणाम करें। प्रणिधाय शिरो भूम्यां नमस्कारं करोति: य:। तत्क्षणात् सर्वपापेभ्यो मुच्यते नात्र संशय:॥ (ब्रह्म पुराण 21/19) अर्थात् जो प्राणी अपने मस्तक को भूमि पर टेककर सूर्यदेव को नमस्कार करता है, वह उसी क्षण समस्त पापों से छुटकारा पा जाता है। इसमें नाममात्र को भी संशय नहीं है।*
🌞 *सूर्य के 21 नाम, 108 नाम या 12 नाम से युक्त स्तोत्र का पाठ करें। सूर्यसहस्त्रनाम का पाठ अत्यंत लाभकारक है। सूर्याष्टकम् का पाठ करें। आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।*
🙏🏻 *तेल, नमक तथा अदरक का सेवन न करें। हो सके तो किसी और को भी न करावें।*
🙏🏻 *कुछ विद्वानों के अनुसार इस दिन अपने गुरु को वस्त्र खासकर अचला (अंगोछे जैसा गले में धारण किया जाने वाला वस्त्र), तिल, गाय और दक्षिणा देनी चाहिए।*
🙏🏻 *आज 12 मुखी रुद्राक्ष धारण करने के लिए शुभ दिन है। 12 मुखी रुद्राक्ष धारण करने से बारह आदित्यों की कृपा, ओज तथा तेज प्राप्त होता है साथ ही सूर्य ग्रह के कारकत्व में शुभता आती है। सूर्य के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।*
🌞 *सूर्य को बली बनाने के लिए आज लाल रंग की मौली में 7 गांठें सूर्य मंत्र को 21-21 बार पढ़ते हुए एक माला बना लें. इस माला को सूर्य देव को नमस्कार करते हुए सुबहा के समय गले में या दायें हाथ में धारण कर लें।*
🌞 *तिल के तेल का दिया सूर्य भगवान को दिखाएँ व ये मंत्र बोलें : “जपा कुसुम संकाशं काश्य पेयम महा द्युतिम । तमो अरिम सर्व पापघ्नं प्रणतोस्मी दिवाकर ।।”*
*कुंकुम, गन्ध, पुष्प, धूप् तथा नैवेद्य आदि उपचारों से पूजन कर इस मन्त्र से भगवान् सूर्य से क्षमा-प्रार्थना करे : “ भानो भास्कर मार्तण्ड चण्डरश्मे दिवाकर। आरोग्यमायुर्विजयं पुत्रं देहि न्मोस्तु ते।।”*
🌞 *सूर्य भगवान के २१ नाम* 🌞
🙏🏻 *भगवान सूर्य ने साम्ब से कहा – मैं अपने अतिशय गोपनीय, पवित्र इक्कीस शुभ नामों को बताता हूँ। इनके पाठ करने से सहस्त्र नाम के पाठ का फल प्राप्त होगा। मेरे इक्कीस नाम इस प्रकार है -*
🌷 *१) विकर्तन ( विप्पतिओं को काटने तथा नष्ट करने वाले),*
🌷 *२) विवस्वान (प्रकाश रूप),*
🌷 *३) मार्तंड (जिन्होंने अंड में बहुत दिनों निवास किया),*
🌷 *४) भास्कर ,
🌷 *५) रवि,*
🌷 *६) लोकप्रकाशक ,*
🌷 *७) श्रीमान,*
🌷 *८) लोक चक्षु ,*
🌷 *९) गृहेश्वर ,*
🌷 *१०) लोक साक्षी ,*
🌷 *११) त्रिलोकेश ,*
🌷 *१२) कर्ता,*
🌷 *१३) हर्ता ,*
🌷 *१४) तमिस्त्रहा (अन्धकार को नष्ट करने वाले) ,*
🌷 *१५) तपन ,*
🌷 *१६) तापन,*
🌷 *१७) शुचि ( पवित्रतम),*
🌷 *१८) सप्ताश्ववाहन ,*
🌷 *१९) गभस्तिहस्त ( किरणे ही जिनके हाथ स्वरुप हैं ),*
🌷 *२०) ब्रह्मा,*
🌷 *२१) सर्वदेवनमस्कृत।*
🙏🏻 *भगवान सूर्य ने कहा – हे साम्ब ! ये इक्कीस नाम मुझे अति प्रिय है। यह स्तवराज के नाम से प्रसिद्द है। यह स्तवराज शरीर को निरोग बनानेवाला, धन की वृद्धि करने वाला, और यशस्कर है। जो कोई इन नामो से उदय और अस्त दोनों संध्याओं के समय मेरी स्तुति करता है वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है।

।।ॐ श्री हरि।।

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