🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞
⛅ *दिनांक 06 दिसम्बर 2017*
⛅ *दिन – बुधवार*
⛅ *विक्रम संवत – 2074*
⛅ *शक संवत -1939*
⛅ *अयन – दक्षिणायण*
⛅ *ऋतु – हेमंत*
⛅ *गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार मास – मार्गशीर्ष*
⛅ *मास – पौष*
⛅ *पक्ष – कृष्ण*
⛅ *तिथि – तृतीया सुबह 10:18 तक तत्पश्चात चतुर्थी*
⛅ *नक्षत्र – पुनर्वसु रात्रि 09:57 तक तत्पश्चात पुष्य*
⛅ *योग – शुक्ल शाम 03:56 तक तत्पश्चात ब्रह्म*
⛅ *राहुकाल – दोपहर 12:29 से दोपहर 01:50 तक*
⛅ *सूर्योदय – 07:03*
⛅ *सूर्यास्त – 17:55*
⛅ *दिशाशूल – उत्तर दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण – संकष्ट चतुर्थी (चन्द्रोदय रात्रि 08:58), सौभाग्य सुंदरी व्रत*
💥 *विशेष – तृतीया को पर्वल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है एवं चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *गुरुपुष्यामृत योग* 🌷
➡ *07 दिसम्बर 2017 गुरुवार को (सूर्योदय से रात्रि 07:54 तक) गुरुपुष्यामृत योग है ।*
🙏🏻 *‘शिव पुराण’ में पुष्य नक्षत्र को भगवान शिव की विभूति बताया गया है | पुष्य नक्षत्र के प्रभाव से अनिष्ट-से-अनिष्टकर दोष भी समाप्तप्राय और निष्फल-से हो जाते हैं, वे हमारे लिए पुष्य नक्षत्र के पूरक बनकर अनुकूल फलदायी हो जाते हैं | ‘सर्वसिद्धिकर: पुष्य: |’ इस शास्त्रवचन के अनुसार पुष्य नक्षत्र सर्वसिद्धिकर है | पुष्य नक्षत्र में किये गए श्राद्ध से पितरों को अक्षय तृप्ति होती है तथा कर्ता को धन, पुत्रादि की प्राप्ति होती है |*
🙏🏻 *देवगुरु बृहस्पति ग्रह का उद्भव पुष्य नक्षत्र से हुआ था, अत: पुष्य व बृहस्पति का अभिन्न संबंध है | पुष्टिप्रदायक पुष्य नक्षत्र का वारों में श्रेष्ठ बृहस्पतिवार (गुरुवार) से योग होने पर वह अति दुर्लभ ‘गुरुपुष्यामृत योग‘ कहलाता है |*
🌷 *गुरौ पुष्यसमायोगे सिद्धयोग: प्रकीर्तित: |*
🙏🏻 *शुभ, मांगलिक कर्मों के संपादनार्थ गुरु-पुष्यामृत योग वरदान सिद्ध होता है |*
🙏🏻 *इस योग में किया गया जप, ध्यान, दान, पुण्य महाफलदायी होता है परंतु पुष्य नक्षत्र में विवाह व उससे संबधित सभी मांगलिक कार्य वर्जित हैं |*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🌷 *गुरुपुष्यामृत योग* 🌷
🙏🏻 *पुष्टिप्रदायक पुष्य नक्षत्र का वारों में श्रेष्ट बृहस्पतिवार (गुरुवार ) से योग होने पर यह अति दुर्लभ ” गुरुपुष्यामृत योग’ कहलाता है । ‘ सर्वसिद्धिकरः पुष्यः । ‘ इस शास्त्रवचन के अनुसार पुष्य नक्षत्र सर्वसिद्धिकर है । शुभ, मांगलिक कर्मों के संपादनार्थ गुरुपुष्यामृत योग वरदान सिद्ध होता है । व्यापारिक कार्यों के लिए तो यह विशेष लाभदायी माना गया है । इस योग में किया गया जप , ध्यान, दान, पुण्य महाफलदायी होता है परंतु पुष्य में विवाह व उससे संबंधित सभी मांगलिक कार्य वर्जित हैं ।*
🙏🏻 *(कर्मयोग दैनंदिनी २०१२ से )*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *कैसे बदले दुर्भाग्य को सौभाग्य में* 🌷
🌳 *· बरगद के पत्ते पर गुरुपुष्य या रविपुष्य योग में हल्दी से स्वस्तिक बनाकर घर में रखें |*
🙏🏻 *-लोककल्याण सेतु – जून २०१४ से*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *पुष्य नक्षत्र योग* 🌷
🙏🏻 *१०८ मोती की माला लेकर जो गुरुमंत्र का जप करता है, श्रद्धापूर्वक तो २७ नक्षत्र के देवता उसपर खुश होते हैं और नक्षत्रों में मुख्य है पुष्य नक्षत्र, और पुष्य नक्षत्र के स्वामी हैं देवगुरु ब्रहस्पति | पुष्य नक्षत्र समृद्धि देनेवाला है, सम्पति बढ़ानेवाला है | उस दिन ब्रहस्पति का पूजन करना चाहिये | ब्रहस्पति को तो हमने देखा नहीं तो सद्गुरु को ही देखकर उनका पूजन करें और मन ही मन ये मंत्र बोले –*
🌷 *ॐ ऐं क्लीं ब्रहस्पतये नम : |…… ॐ ऐं क्लीं ब्रहस्पतये नम :*

।।ॐ श्री हरि।।

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