आज मकर संक्रांति हउवे आ रउआ सब के मकर संक्रांति के छईंटी भर के सुभकामना बडुवे .. 🙂

का ह मकर संक्रांति –

मकर संक्रांति के दिने सूर्य भगवान धनु राशि के छोड़ के मकर राशि में प्रवेश करनी। मकर संक्रांति के दिन से ही सूर्य के उत्तरायण गति सुरु होला एही से कहीं कहीं एह दिन के उत्तरायणी भी कहाला।

शाश्त्र के अनुसार, दक्षिणायण के देवता लोग के रात माने कौनो शुभ काम न करे वाला आ उत्तरायण के देवता लोग के दिन माने की शुभ काम करे लायक मानल जाला। एह दिन जप, टप, दान, नहान, तर्पण आदि धार्मिक क्रिया करम करे के विशेष महत्व बा. अइसन मानल जाला की एह दिन कइल गइल दान सौ गुना मिलेला।

मकर संक्रांति के दिने गंगा नहाये आ गंगाजी के घाट पर दान के बहुत शुभ मानल गइल बा। एह पर्व पर तीर्थराज प्रयाग आ गंगासागर में नहाये की महास्नान कहल गइल बा। अइसे त सूर्य सब ग्रह पर प्रभाव डालेले बाक़िर कर्क आ मकर राशि में प्रवेश धार्मिक दृष्टि के अत्यंत फलदायक होला। आ ई छः छः महीना के अंतराल में होला। भारत देश उत्तरी गोलार्द में बाटे। मकर संक्रांति के पाहिले सूर्य दक्षिणी गोलार्ध में रहेला माने की भारत से बहुत दूर एही से हमनी किहां रात बड़ आ दिन छोट होला आ जाड़ा के मौसम रहेला। बाकिर मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरी गोलार्द में आवे लागे ले एही से एह घरी रात छोट आ दिन दिन बड़ होखे ला आ गर्मी के मौसम सुरु हो जाला। भारतीय पंचांग के सगरी तिथि चन्द्रमा के गति के आधार मान के निर्धारित होला बाकिर मकर संक्रांति के सूर्य के गति से निर्धारण होला। एही से सामान्यतः ई पर्व १४ जनवरी के ही पड़ेला। बाकिर एह बेरी ई १५ जनवरी के पड़ल बा।

महाभारत काल में भीष्म पितामह आपन देह तयाग करे खातिर मकर सक्रांति के दिन के चुनले रहनी आ ओह दिन थक सरसैया पर सूत के सूर्य के उत्तरायण होखे के इंतजार कइले। मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भागिरथ के पीछे पीछे चल के कपिल मुनि के आश्रम से होते हुए सागर में मिल गइनी।
शास्त्रों के अनुसार यह बेहद शुभ दिन ही ना ह, बल्कि शुभ दिनन के सुरुवात ह।

भगवान की उपासना के साथ दिन प्रारंभ करीं सबे रउआ लोगिन के मकर संक्रांति के छईंटी भर के सुभकामना बडुवे

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