पिछले कुछ दिनों से आनंद कुमार सुपर 30 वाले लगातार चर्चा में है . दैनिक जागरण रोज़ नए नए खुलासे करके आनंद कुमार की पोल खोल रहा है लेकिन अब तक आनंद कुमार की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है . जब जागरण के पत्रकार बंधू ने उनसे संपर्क करने की कोशिश भी फिर भी जवाब नहीं आया !

जागरण के खुलासे के बाद सोशल साइट पे बिहार के लोगो ने आनंद कुमार से पूछना चालू किया सर सच क्या है ! जागरण के सवालो का जवाब दीजिये ..फिलहाल अभी तक सब लोग आनंद कुमार के जवाब के इंतज़ार में ही है लेकिन बिहार के कुछ लोग आनंद कुमार को मसीहा बताने लगे , सवाल पूछने वाले को दलाल , बिहार विरोधी और कुछ लोगो ने तो गाली गलौज देना भी शुरू कर दिया .

खैर ऐसे लोगो को समझाना मुश्किल है फिर भी उन्हें बताया तो जा ही सकता है बिहार के असली गौरव आनंद कुमार नहीं बल्कि पटवा टोली के ये बच्चे है !

बिहार के गया जिले का पटवा टोली गांव ‘IIT हब’ के नाम से जाना जाता है . ये गांव कभी बुनकरी के काम के लिए जाना जाता था। काफी पिछड़ा हुआ था, पर पिछले 23 सालों से इस गांव के लड़के कुछ ऐसा कमाल कर रहे हैं, जो संभवत: देश के दूसरे गांवों में देखने को नहीं मिलता। बुनकरों के इस गांव से हर साल दर्जनों छात्र आईआईटी और एनआईटी के लिए चुने जाते हैं।

गया जिले का ये गांव कभी नक्सल और जातीय हिंसा से प्रभावित था। यहां के पटवा, बुनकरी का काम करते हैं। ये अन्य पिछड़ी जाति में आते हैं। पहली बार 1992 में इस गांव से एक छात्र जितेन्द्र ने आईआईटी में दाखिला पाया था। ख़ास बात ये है कि आईआईटी में एडमिशन पाने वाले अधिकांश छात्रों के माता-पिता या तो कम पढ़े-लिखे हैं या पूरी तरह से निरक्षर हैं। अधिकांश को आईआईटी का मतलब भी नहीं पता है। फिर भी कम से कम 300 बच्चे अब तक आईआईटी और अन्य प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज का सफर तय कर चुके हैं।

Leave a Reply