कुछ ही दिनों पहले की बात है की एक वामपंथी भाई Himanshu Kumar ने मेरा मुस्लिम नाम पढ कर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दी ! वह इस उम्मीद में थे की मै भी उनके अन्य मुस्लिम मित्रों के समान उनकी पाकिस्तानी परस्त और हिन्दूओ के विरोधी विचारों से सहमत हो उनकी पोस्ट पर वाहवाही करुगीं !पर उन्हें भान ही नहीं था की उन्होंने बर्रीया के छत्ते में हाथ डाल दिया है !
करवा चौथ का दिन था , उन्होंने फौरन अपनी कपट का जाल फैला कर अपनी पत्नी और बच्चियों के फोटो डाल दीये , और कहने लगे की यह एक कुप्रथा है मेरी पत्नी ने कभी उपवास नहीं किया पर मै जिन्दा हु!
अब बारी हमारी थी हमने भी फौरन कमेंट किया की जनाब मान लेते हैं यह कुप्रथा है , पर देश को, महिलाओं को इससे कोई खास नुकसान नहीं पहुंचता ! बल्कि आपकी गांधीजी वाली विचारधारा के मुताबिक देश का बहुत अन्न बच जाता है और हर व्यक्ति को हफ्ते में एक बार हफ्ते में उपवास करना चाहिए ! अब आप कृपया महिलाओ के हित में तिन तलाक , हलाला जैसी कुप्रथाओं पर कृपया अपनी राय रखें !
अब जनाब बुरे फंसे तो कमेंट अनदेखा कर गये क्योंकि अगर कुछ इन कुप्रथाओं के खिलाफ लिखते तो इनके मोमिन उदारवादी मित्र इनकी वहीं जुतम परचम कर देते !
कुछ देर इंतजार कर हमने दुसरा सवाल दागा की जनाब आप क्या रजवाड़ों के परिवार से हैं की आपकी पत्नी, बच्चे पांच , पांच हजार से ज्यादा के कपड़े पहने हैं , जबकि आप पिछले कई सालों से आदिवासियो के इलाके में रह कर बिना कुछ कमाए इनकी सेवा कर रहे हैं ?
तब जनाब की पत्नी फरमाती है की कपड़े( ब्राण्डेड) उन्हें दान में मिले हैं और यह भी बताती है की हम आदिवासियों को गलत समझते हैं कि वे बेहद गरीब है , उनके पास अपार वन संपदा है !
अब मान भी लिया जाए की उनकी पत्नी, बच्चियों को दान में ब्राण्डेड कपडे मिल गये जो जिन्स के पेंट और टी शर्ट थे पर क्या दान में ब्रांडेड कीमती बराबर नाप के जुते भी मिले थे जो आदिवासी सेवक का परिवार धारण किये था ?
खुद को नास्तिक कहते हैं पर आदिवासियों को रावण जलाने का विरोध कर सिखाते हैं की रावण ही आपका वंशज था, यह मानते भी है की वहां संघ आदिवासियों की सेवा कर रहा है पर इन्हें शिकायत है की संघ उन्हें हिन्दू बना रहा है ! अगर वह हिन्दु नहीं ? तब इन्हीं जनाब जनाब के मुताबिक उनके नाम रामनाथ , शिव कुमार जैसे कैसे हो गये ? क्या रावण के मानने वाले अपने बच्चों के नाम राम पर रखते हैं ?
दिपावली पर कुटिल खुद को दिल्ली में बता कर अस्थमा के मरीज बन जाते है , वायु प्रदुषण पर पोस्ट करते है पर मस्जिद से सुबह 5 बजे उठते ध्वनि प्रदूषण पर मौन है !
जब नजीब की मां को धरने से पुलिस उठा ले गई तो इन जनाब ने पोस्ट की ‘मुझे हिन्दू होने पर शर्म आती है, हिन्दू शुरू से हिंसक है, वह दलितों, मुसलमानों पर अत्याचार करते हैं ‘ ! लेकिन इनकी कलम उन मुसलमानों पर कभी नहीं उठी जो लाखों नजीब की मां समान कई हिन्दू , शिया , सुफीयों की मांओ के बच्चों को बमों से उडा चिथडे चिथडे कर देते हैं, वहाँ इन्हें इस्लाम पर शर्म नहीं आती !
दरअसल अधिकतर वामपंथियों का आदिवासी इलाकों में पाए जाने का कारण गहरा है, जब कोई भी सरकारी प्रोजेक्ट कागजों पर आता है तब यह लोग आदिवासियों को बहला फुसलाकर कर अपने लोगों की कई झोपड़ीयां बनावा देते हैं और इन्हें आदिवासी बता कर सरकारों से मुआवजा मांगते हैं , किंतु सरकार के पास आंकड़े सालों पुराने होते हैं इसलिए उन्हें मुआवजा नहीं मिलता और फिर शुरू होता है सरकार पर दबाव बनाने का खेल , जल समाघी , आदिवासी भुख हड़ताल, प्रदर्शन आदी आदी !!!
एक उदाहरण, माननीय कोर्ट ने सरदार सरोवर डेम के विस्थापितों को अपने निरीक्षण में मुआवजा बटवाया, अगर डुब की भुमी की किमत 5 लाख है तो सिर्फ 5 लाख रुपए नहीं बल्कि सारे उत्तराधिकारीयो को 5, 5 लाख का अनुमोदन किया और सरकार ने सारा पैसा कोर्ट में जमा किया !!!!
कई फेक कब्जाधारीयों के विलाप आपके सामने ही हैं !!!

( फरीदा खानम के वाल से साभार  )

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