ऐसा लग रहा है कि सत्ता से बेदखल होने और फिर उसके बाद राजद सुप्रीमो लालू यादव के जेल जाने के बाद से राजद और कांग्रेस के नेता बौखला गए हैं। तभी तो वह अपनी उलूल जुलूल हरकतों और बयानों से कुछ ना कुछ बखेड़ा आए दिन खड़ा करते ही रहते हैं।

ताजातरीन मामले में 2019 में लोकसभा चुनाव के साथ ही बिहार विधानसभा चुनाव कराने को लेकर जदयू की सहमति पर कांग्रेस ने हमला बोला है। कांग्रेस नेता प्रेमचंद मिश्रा ने जदयू पर हमला बोलते हुए कहा कि जदयू अकेले चुनाव लड़ने से डरती है और ये सोचती है कि मोदी जी के साथ चुनाव लड़कर उनका भी बेड़ा पार हो जाएगा।

प्रेमचंद ने कहा कि पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में जदयू ने बीजेपी के खिलाफ लड़ा था। जदयू को एंटी बीजेपी वोट मिले थे। उसके बाद परिस्थितियां बदल गई। महागठबंधन को तोड़कर जदयू ने बीजेपी के साथ हाथ मिला लिया। उन्होंने कहा कि एंटी बीजेपी वोट लेने के बाद भी भाजपा के साथ मिलकर बिहार में सरकार बनाने से नीतीश कुमार और जदयू की विश्वसनीयता कम हुई है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि विश्वसनीयता कम होने के बाद जदयू अकेले चुनाव लड़ना नहीं चाहती है। उसे अकेले चुनाव लड़ने में डर लग रहा है। जदयू को लगता है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होने से मोदी के साथ-साथ उनका भी बेड़ा पार हो जाएगा। इसी रणनीति के तहत जदयू 2019 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ करवाना चाहती है। उन्होंने कहा कि अगर एक साथ चुनाव होते हैं तो कांग्रेस और अन्य विरोधी पार्टियां भी चुनाव में उतरड़ने को तैयार है।

गौरतलब है कि जदयू ने साफ शब्दों में कह दिया है कि पार्टी 2019 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के लिए तैयार है। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने बुधवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि पार्टी दोनों चुनाव एक साथ कराने की पक्षधर रही है और अब हम पूरी तरह दोनों चुनाव एक साथ कराने के लिए तैयार हैं। इससे पहले भी जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार का समर्थन किया था कि दोनों चुनाव एक साथ कराए जाएं।

इससे साथ ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी कहा था कि 2019 के लोकसभा चुनाव के साथ बिहार विधानसभा चुनाव कराने का कोई विचार नहीं है, लेकिन एेसा हो तो इसका मैं समर्थन करता हूं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि इसके लिए संविधान में संशोधन करना पड़ेगा। नीतीश कुमार ने कहा था कि हर चुनाव अलग-अलग होने से राज्यों के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ता है और हर साल होने वाले चुनावों से अधिकारियों का ध्यान भी चुनावी कार्य में व्यस्तता से उनके नियमित काम पर कम हो जाता है इसीलिए ये दोनों चुनाव एक साथ कराने का विचार सही है।

लेकिन उन्होंने यह भी कहा था कि उनके समर्थन का यह मतलब नहीं लगाया जाना चाहिए कि बिहार में आने वाले लोकसभा के साथ चुनाव कराए जाएंगे। इस संबंध में सारी अटकलों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। लेकिन आज नीतीश ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर पूरे देश में बहस भी कराई जानी चाहिए

Leave a Reply