30 अक्तूबर 1990 को अयोध्या में हुए राम भक्तो पर हुए अत्याचार पर लिखी कविता की याद आते ही मन भावुक हो जाता है। |

पाप कितना हुआ राम के गाँव मे ,
जुल्म कितना किया राम के गाँव मे |
एक दिन एक सुल्तान पागल हुआ ,
जाने क्या क्या किया राम के गाँव मे |
सरयू रोने लगी लाल पानी हुआ ,
खून इतना बहा राम के गाँव मे |
राम के काम आना प्रथम ध्येय था ,
अपना जीवन दिया राम के गाँव मे |
पूज्य मंदिर को मस्जिद बताना गलत ,
राम मंदिर रहा राम के गाँव मे |
आस्था का अदालत से क्या वास्ता ,
फैसला ये हुआ राम के गाँव मे |
आप इतिहास पढ़कर जरा देखिये,
त्याग कितना हुआ राम के गाँव मे |
व्यर्थ जाये नहीं खून जितना बहा ,
हमने प्रण कर लिया राम के गाँव मे |
राम मंदिर बने कामना है यही ,
राम को देखना है राम के गाँव मे ||

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