परम पुनीत मां गंगा भारत की जीवन रेखा है. कल-कल छल-छल बहती इसी मां गंगा के पावन तट पर स्थित है सिमरियाधाम. बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र में स्थित यह तीर्थ कई मायने में श्रेष्ठ है.
तीन बार हुआ देवी का जन्म
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1.कहते हैं राजा जनक के मिथिलांचल की धरती पर तीन बार देवी का अवतरण हुआ, जनकपुर में मां सीता के जन्म की कथा सभी जानते हैं. सिमरियाधाम से थोड़ी दूरी पर स्थित पुनौराधाम में देवी अहिल्या का जन्म स्थान है और तीसरी बार मिथिलांचल के क्षेत्र में हुए समुद्र मंथन में लक्ष्मी के रूप में साक्षात देवी का अवतरित हुईं.
2.यहीं हुआ अमृत वितरण
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सिमरियाधाम ही वह स्थान है जहां समुद्र मंथन के बाद भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर मंथन से निकले अमृत का वितरण किया था.
3.कल्पवास है कुंभ का अवेशष
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सिमरियाधाम में लगने वाले कल्पवास की बड़ी प्रसिद्धि है. धर्म संस्कृति के जानकार कल्पवास को कुंभ का ही अवशेष मानते हैं. सिमरिया के कल्पवास में देश भर से और नेपाल तक से श्रद्धालु आते हैं.
4. मां सीता को यही से दी गयी विदाई
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मां सीता जब विवाह के बाद अपने ससुराल जा रही थी तो मिथिलावासियों ने उन्हें मिथिला की इस सीमा सिमरियाधाम तक आकर विदाई दी थी.
5. विद्यापति के लिए आयीं मां गंगा
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शिव भक्त कवि विद्यापति की पुकार सुनकर मां गंगा सिमरियाधाम के पावन तट तक स्वयं आयीं थीं.
6. सिमरिधाम में हुआ कर्ण का दाह संस्कार
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अंग प्रदेश के राजा कर्ण ने इसी स्थान पर अपने अंतिम संस्कार की इच्छा जतायी थी औऱ वैसा ही हुआ भी
8. जयमंगलागढ है यहा से थोड़ी दूर
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प्रसिद्ध सिद्ध तांत्रिक पीठ मां जयमंगलागढ़ सिमरियाधाम से थोड़ी ही दूरी पर स्थित है.
9. देश का तीसरा चौसठ योगिनी का मंदिर
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सिमरियाधाम में ही चौसठ योगिनी का देश का तीसरा मंदिर स्थित है.
10. दुनिया में समुद्र मंथन का तीसरा प्रारूप
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समुद्र मंथन जिससे भारत का बच्चा-बच्चा परिचित है उसका प्रारूप पूरी दुनिया में मात्र तीन स्थानों पर है. थाइलैंड की राजधानी बैंकाक के सुवर्णभूमि हवाई अड्डे पर, दूसरा सिमरियाधा से थोड़ी दूर स्थित मंदार पर्वत पर और तीसरा स्वयं सिमरियाधाम में.
11. स्वामी चिदात्मन जी की साधना स्थली
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सबसे बड़ी बात कि सिमरिया में गंगा के पावन तट पर गंगापुत्र आदि शक्ति जगदंबा के परम भक्त करापात्री अग्निहोत्री परमहंस स्वामी चिदात्मन जी महाराज पिछले लगभग चार दशक से धुनि रमाए बैठे हैं.

(  श्याम किशोर सहाय जी के फेसबुक वाल से साभार )

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