बिहार के सबसे महत्वपूर्ण और पवित्रता के महापर्व छठ पूजा की तैयारी तो पूरे बिहार में कई दिन पहले ही शुरू हो जाती है।
चार दिवसीय इस महापर्व का प्रारंभ ‘नहाय-खाय’ से प्रारम्भ होकर सप्तमी के दिन उगते सूर्य को अर्घ्यदान के बाद “पारणा” से समापन होता है।
आइए आज आपको बताते हैं कि 2017 में छठ पूजा की सभी तिथियां कौन कौन सी है:

नहाय खाय:
दिनाँक 24 अक्टूबर दिन मंगलवार

चार चार दिवसीय छठ महापर्व की शुरूआत नहाए खाए के साथ प्रारंभ होती है।पवित्रता का विशेष ध्यान रखे जाने वाले इस त्यौहार में घर और आस-पास को अत्यंत ही साफ-सफाई और स्वच्छ किया जाता है।व्रत करने वाले व्रती इस दिन स्नान-ध्यान और पूजा करके शुद्ध और सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं जिसमें विशेष रुप से कद्दू की सब्जी और चावल का सेवन किया जाता है।

खरना:

दिनाँक 25 अक्टूबर दिन बुधवार

छठ महापर्व दूसरे दिन व्रत करने वाले सभी व्रतधारी पूरे दिन उपवास रहते हैं। शाम को गन्ने के रस से बनी हुई गुड़ और चावल का खीर जिसे “रसियाव” कहा जाता है सेवन करते हैं।
यह एक बहुत बड़ा प्रसाद माना जाता है जो घर के सभी सदस्य और आस पड़ोस के लोग भी बड़े ही भक्ति भाव से ग्रहण करते हैं।

संध्या अर्ध्य:
दिनाँक 26 अक्टूबर दिन बृहस्पतिवार

इस बार यह तिथि 26 अक्टूबर को पड़ रही है।
यह छठ महापर्व का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। इस दिन पूरे दिन निर्जला उपवास रखने के बाद घाट पर जाकर शाम को डूबते हुए सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया जाता है। शाम का अर्घ्य के बाद रात में छठी माता के गीत गाए जाते हैं और व्रत कथा भी सुनी जाती है।

प्रातः अर्घ्य
दिनाँक 27 अक्टूबर दिन शुक्रवार

छठ पर्व के चौथे और अंतिम दिन उदीयमान भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया जाता है।अर्घ्य देने के बाद घाट पर छठ मइया और भगवान भास्कर से संतान-रक्षा और घर परिवार के सुख शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।
इस पूजन के बाद गांव-परिवार के सभी लोग आपस में प्रसाद वितरण करते हैं।
उसके बाद सभी व्रती लोग पारण कर अपना उपवास खोलते हैं।

 

प्रेम से बोलिए छठी मैया की जय।
सूर्य भगवान की जय।

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