केंद्र की मोदी सरकार तीन तलाक देकर पत्नी को निराश्रित छोड़ने वाले पतियों को सबक सिखाने के लिए कड़ा कानून लाने की तैयारी कर रही है। कानून के मसौदे पर राज्यों से राय मांगी गई है। कानून में एक बार में तीन तलाक यानी तलाक-ए-बिद्दत संज्ञेय और गैर जमानती अपराध होगा। इसमें दोषी पति को तीन साल तक की कैद और जुर्माने की सजा का प्रावधान होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने गत 22 अगस्त को एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) को असंवैधानिक बताकर निरस्त कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट से असंवैधानिक घोषित होने के बावजूद लगातार तीन तलाक की घटनाएं हो रही थीं। इसके मद्देनजर प्रधानमंत्री ने नए कानून पर विचार करने के लिए मंत्रिमंडलीय कमेटी का गठन किया था। इसमें राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, रविशंकर प्रसाद, पीपी चौधरी और डॉक्टर जितेंद्र सिंह शामिल थे।
सरकार ने पीडि़त मुस्लिम महिलाओं को सुरक्षा देने और पतियों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए कड़ा कानून लाने की ठानी है। सूत्र बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पहले इस साल तीन तलाक की 177 घटनाएं दर्ज हुई, जबकि फैसला आने के बाद 67 शिकायतें हुई हैं। सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश के हैं। ये आंकड़े दर्ज शिकायतों के हैं। वास्तव में इससे भी ज्यादा मामले हो सकते हैं।
हालिया मामला एएमयू प्रोफेसर का है, जिसने पत्नी को वाट्सएप से तीन तलाक दिया है। सूत्र बताते हैं कि सरकार सामाजिक सुधार के तहत यह सख्त कानून ला रही है। इसका मकसद गैरकानूनी ढंग से तलाक देकर बेसहारा छोड़ी गई मुस्लिम महिलाओं को सुरक्षा और संरक्षण देना है, ताकि उन्हें बच्चों की कस्टडी हासिल हो। नए कानून का मसौदा तैयार हो गया है। केंद्र सरकार ने कानून पर राज्यों को पत्र भेजकर सुझाव मांगा है। माना जा रहा है कि सरकार इसी शीत सत्र में इस पर बिल ला सकती है।
शादी, तलाक, बच्चों की कस्टडी आदि समवर्ती सूची का विषय है, जिस पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं। लेकिन, राज्य केंद्रीय कानून के खिलाफ कानून नहीं बना सकते। सूत्र बताते हैं कि वैसे तो आने वाला कानून भविष्य से लागू किया जाएगा। लेकिन, इससे पहले भी जिस महिला को गैरकानूनी ढंग से तीन तलाक देकर छोड़ा गया है, वह मजिस्ट्रेट की अदालत में भरण-पोषण और बच्चों की कस्टडी की मांग कर सकती है। सरकार कानून सिर्फ इसलिए ला रही है, क्योंकि पीडि़त महिलाओं का कहना था कि उनके पास कोई ऐसी फोरम नहीं है, जहां जाकर वे मदद मांग सकें। इस संबंध में घरेलू ¨हसा कानून बहुत प्रभावी नहीं हो रहा था। फैसला देने वाली पीठ में शामिल दो न्यायाधीशों ने भी सरकार को इस पर कानून बनाने का सुझाव दिया था।
ऐसा होगा नया कानून
मुस्लिम वुमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरिज जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू होगा।
यह कानून सिर्फ एक बार में तीन तलाक यानी तलाक-ए-बिद्दत के मामलों में ही लागू होगा।
अगर कोई व्यक्ति अपनी पत्नी को एक बार में तीन तलाक देता है तो वह गैर कानूनी होगा।
तीन तलाक का हर रूप चाहे वह लिखित हो, बोला गया हो या इलेक्ट्रॉनिक रूप में हो, गैरकानूनी होगा।
पीडि़त महिला मजिस्ट्रेट की अदालत में गुजारा भत्ता और नाबालिग बच्चों की कस्टडी मांग सकती है। मजिस्ट्रेट इस पर उचित आदेश देगा

Leave a Reply