क्या गुण्डों जैसी भाषा बोलने वाले तेज प्रताप बिहार को उसका गौरव लौटा पाएँगे या फिर ये अपने पिता की ही तरह बिहार की राजनीति को एक माखौल बना के रख देंगे? क्या बिहार ऐसे ही नेता की अपेक्षा रखता है??

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