नौसेना, भारतीय सशस्त्र सेना का महत्तवपूर्ण अंग है। यह गृह मंत्रालय भारत सरकार के अधीन काम करता है। 4 दिसंबर को नौसेना दिवस के रूप में मनाया जाता है।

गठन: 1830 (4 दिसंबर) 1971 से नेवी डे के रूप में मनाया जाता है।
स्लोगन: शं नो वरुण
जवानों की संख्या: 79,023 (295 शिप और 251 एयर क्राफ्ट)
वर्तमान नौसेनाध्यक्ष: एडमिरल सुनील लांबा
मुख्यालय: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली

भारतीय नौसेना 5600 वर्षों के अपने गौरवशाली इतिहास के साथ भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति की रक्षक है। 79,000 नौसेनिको से लैस अपने देश की नेवी विश्व की पाँचवी सबसे बड़ी नौसेना है।

भारतीय सीमा की सुरक्षा को प्रमुखता से निभाते हुए विश्व के अन्य प्रमुख मित्र राष्ट्रों के साथ सैन्य अभ्यास में भी सम्मिलित होती है। पिछले कुछ वर्षों से लागातार आधुनिकीकरण के अपने प्रयास से यह विश्व की एक प्रमुख शक्ति बनने की भारत की महत्त्वाकांक्षा को सफल बनाने की दिशा में है।

नौसेना के गठन का उद्देश्य:
भारतीय नौसेना सन् 1613 ई. में ईस्ट इंडिया कंपनी की युद्धकारिणी सेना के रूप में इंडियन मेरीन संगठित की गई। 1685 ई. में इसका नाम नामकरण “बंबई मेरीन” हुआ, जो 1830 ई. तक चलता रहा। उसके बाद 8 सितंबर 1934 ई. को भारतीय विधानपरिषद् ने भारतीय नौसेना अनुशासन अधिनियम पारित किया और रॉयल इंडियन नेवी का प्रादुर्भाव हुआ।

द्वितीय विश्वयुद्ध के समय नौसेना का विस्तार हुआ और अधिकारी तथा सैनिकों की संख्या 2,000 से बढ़कर 30,000 हो गई और बेड़े में आधुनिक जहाजों की संख्या बढ़ने लगी।

देश की आजादी के बाद नौसेना:

स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत की नौसेना नाम मात्र की थी। दरअसल, भारत से पाक को अलग होने के बाद एक तिहाई सेना पाकिस्तान के हिस्से में चली गई। कुछ अतिशय महत्व के नौसैनिक संस्थान भी पाकिस्तान के हो गए। भारत सरकार ने नौसेना के विस्तार की तत्काल योजना बनाई और एक वर्ष बीतने के पहले ही ग्रेट ब्रिटेन से 7, 030 टन का क्रूजर ” दिल्ली” खरीदा। इसके बाद ध्वंसक ” राजपूत”, ” राणा”, ” रणजीत”, ” गोदावरी”, ” गंगा” और ” गोमती” खरीदे गए।

इसके बाद आठ हजार टन का क्रूजर खरीदा गया। इसका नामकरण ” मैसूर” हुआ। 1964 ई. तक भारतीय बेड़े में वायुयानवाहक, ” विक्रांत” (नौसेना का ध्वजपोत), क्रूजर “दिल्ली” एवं “मैसूर” दो ध्वंसक स्क्वाड्रन तथा अनेक फ्रिगेट स्कवाड्रन थे, जिनमें कुछ अति आधुनिक पनडुब्बीनाशक तथा वायुयाननाशक फ्रिगेट सम्मिलित किए जा चुके थे। ” ब्रह्मपुत्र”, ” व्यास”, ” बेतवा “, ” खुखरी,” ” कृपाण”, ” तलवार” तथा ” त्रिशूल” नए फ्रिगेट हैं, जिनका निर्माण विशेष रीति से हुआ है। ” कावेरी”, ” कृष्ण” और ” तीर” पुराने फ्रिगेट हैं जिनका उपयोग प्रशिक्षण देने में होता है। “कोंकण”, “कारवार”, “काकीनाडा” “कणानूर”, “कडलूर”, “बसीन” तथा “बिमलीपट्टम” से सुंरग हटानेवाले तीन स्क्वाड्रन तैयार किए गए हैं।

छोटे नौसैनिक जहाजों के नवनिर्माण का कार्य प्रारंभ हो चुका है और तीन सागरमुख प्रतिरक्षा नौकाएँ, “अजय”, “अक्षय” तथा “अभय” और एक नौबंध “ध्रुवक” तैयार हो चुके हैं। कोचीन, लोणावला, तथा जामनगर में भारतीय नौसेना के प्रशिक्षण संस्थान हैं। आई एन एस अरिहन्त भारत की नाभिकीय उर्जा पनडुब्बी है।

भारतीय नौसेना दिवस समारोह की विशेषता

भारतीय नौसेना दिवस समारोह का आयोजन पूर्वी नौसेना कमांड द्वारा विशाखापट्नम में किया जाता है। इस अवसर पर शहीद नौसैनिकों की स्मृति में पुष्पचक्र अर्पित किया जाता है। तत्पश्चात पनडुब्बी जहाज, हवाई जहाज पोत, विमानों आदि का प्रदर्शन किया जाता है। आर.के. समुद्री तट पर आयोजित इस समारोह में हजारों नागरिक सहभागी होते हैं।

इस अवसर पर सेनानायक द्वारा नागरिकों से समुद्री तट को स्वच्छ रखने की अपील की जाती है, जिससे कि पक्षियों की आवाजाही को समुद्री तट से रोका जा सके और जल सीमा सुरक्षा के कार्य को सुगम बनाया जा सके।

भारतीय नौसेना के बेड़े में निम्न पोत शामिल हैं (मुख्य रूप से)-
विमान वाहक
-विक्रमादित्य, विराट
विध्वंसक/विनाशक
-दिल्ली श्रेणी
-राजपूत श्रेणी
-कोलकाता श्रेणी

फ्रिगेट
-शिवालिक श्रेणी – शिवालिक , सतपुड़ा, सहयाद्रि
-तलवार श्रेणी – तलवार, त्रिशूल, तबर, तेग, तरकश, त्रिकंड
-ब्रह्मपुत्र श्रेणी, – ब्रह्मपुत्र, ब्यास, बेतवा
-गोदावरी श्रेणी, – गोदावरी, गोमती, गंगा
-नीलगिरी श्रेणी (लिएण्डर) ,

कॉर्वेट
-कोरा श्रेणी – कोरा, किर्च, कुलिश, कर्मुक
-खुकरी श्रेणी – किरपाण, कुठार, खंजर, खुकरी
-वीर श्रेणी – वीर, निर्भीक, निपट, निःशंक, निर्घट, विभूति, विपुल, विनाश, विद्युत, नाशक, प्रलय, प्रबल,
-अभय श्रेणी – अभय, अजय, अक्षय, अग्रय,
-परियोजना 28- कामोर्ता

पनडुब्बियाँ
-सिंधुघोष श्रेणी – सिंधुघोष, सिंधुध्वज, सिंधुराज, सिंधुवीर, सिंधुरत्न, सिंधुकेसरी, सिंधुकीर्ति, सिंधुविजय, सिंधुरक्षक, सिंधुराष्ट्र
-शिशुमार श्रेणी – शिशुमार, शंकुश, शल्कि, शंकुल
-फॉक्सट्रॉट श्रेणी
-स्कोर्पीन श्रेणी

परमाणु पनडुब्बियाँ
-अकुल श्रेणी – चक्र
-अरिहन्त
-आधुनिक तकनीक पोत (ए टी वी)

उभयचर युद्ध पोत
-ऑस्टिन श्रेणी- जलाश्व
-शार्दूल श्रेणी – शार्दूल, केसरी
-मगर श्रेणी – मगर, घड़ियाल, ऐरावत
-कुम्भीर श्रेणी – चीता, महिष, गुलदार, कुम्भीर
-Polnocny श्रेणी
-निकोबार श्रेणी
-एलसीयू- एलसीयू 33, एलसीयू 35, एलसीयू 36, एलसीयू 37, एलसीयू 38, एलसीयू 39
गश्त यान/छोटे युद्धक जहाज
-सुकन्या श्रेणी – सुकन्या, सुभद्रा, सुवर्णा, सावित्री, शारदा, सुजाता, सरयू, सुनयना, सुमेधा
-बंगरम श्रेणी – बंगरम, बित्र, बट्टी मल्व, बरतंग
-त्रिंकट श्रेणी – त्रिंकट, तरस
-सुपर द्वोरा-II श्रेणी त्वरित आक्रमण यान (फास्ट अटैक क्राफ्ट) – एफएसी टी-80, टी-81, टी-82, टी-83, टी-84
-कार निकोबार श्रेणी’ त्वरित आक्रमण यान (फास्ट अटैक क्राफ्ट)
-सर्वेक्षण पोत- मकर श्रेणी, संधयक श्रेणी- निरूपक, इन्वेस्टीगेटर, जमुना, सतलज, संधयक, निर्देशक, दर्शक, सर्वेक्षक

 

माईनस्वीपर
-पॉण्डिचेरी श्रेणी – अलेप्पी
-कारवाड़ श्रेणी – कारवाड़, कण्णनौर, कुड्डलौर, काकीनाड़ा, कोझिक्कोड़, कोंकण
-आईएनएस माहे

 

सहायक पोत
-टैंकर- दीपक, ज्योति, आदित्य
-तारपीडो रिकवरी पोत- अस्त्रवाहिनी (टीआरवी 71), टीआरवी 72
-अन्य- मातंग, गज, निरीक्षक

 

ट्रेनिंग/शोध
-तीर, तरंगिनी, सुदर्शिनी, म्हादे, सागरध्वनि

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