जी हां बिहार के बक्सर में पचकोसी मेला लगता है जो पांच दिनों तक चलता है और इस मेले को लिट्टी चोखा मेला भी बोला जाता है . इस मेले का धार्मिक महत्व है पांच दिन तक चलने वाले मेले में पहले दिन अहिरौली, दूसरे दिन नदांव, तीसरे दिन भभुअर, चौथे दिन बड़का नुआंव तथा पांचवे दिन चरित्रवन में लिट्टी चोखा-खाया जाता है।

सदियों से बक्सर की पावन धरती पर लगनेवाले पंचकोशी मेला का इतिहास श्री राम भगवान् से जुड़ा है और काफी पुराना है।ऐसी मान्यता है की भगवान श्रीराम जब विश्वामित्र नगरी पहुंचे तब उन्होंने पांच जगहों की यात्रा की। सबसे पहले बक्सर के अहिल्या धाम अहिरौली में माता अहिल्या का उद्धार कर श्रीराम ने पुआ खाकर इस आयोजन की शुरुआत की थी। इस दौरान भगवान राम ने बक्सर के कुल पांच जगहों का भ्रमण किया और जंहा जो कुछ खाया उस व्यंजन को लोग प्रसाद समझकर खाते है। पंचकोशी यात्रा के अंतिम पड़ाव में भगवन श्रीराम ने बक्सर में लिट्टी चोखा खाकर विदा लिया था। यह तब की बात है जब बक्सर का पौराणिक नाम व्याघ्रसर था। उस वक्त मुनि विश्वामित्र ने भगवान राम को वर्तमान बक्सर के आध्यात्मिक बैभव से अवगत कराया था। तब से यहाँ पे ये मेला लगता है और लोग बाग़ लिट्टी चोखा खाते है .

पहले दिन अहिरौली में श्रद्धालु पकवान और जलेबी प्रसाद स्वरूप ग्रहण करते हैं। दूसरे दिन नदांव में श्रद्धालु खिचड़ी चोखा बनाकर खाते हैं . तीसरे दिन भभुअर में लोग चूड़ा-दही का प्रसाद ग्रहण करते हैं . चौथे दिन बड़का नुआंव सतुआ मुली का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। और पांचवे दिन चरित्रवन में क्या कहना इस दिन तो यहाँ पे बिहार का प्रसिद्ध लिट्टी चोखा-खाया जाता है।

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