शनिवार काे एसकेएम में शिक्षा दिवस समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा की बिहार में ढाई करोड़ स्कूली बच्चे हैं।बिहार की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत है . सरकार ने बिहार की शिक्षा के क्षेत्र में बहुत काम किया है, लेकिन अब भी बहुत किया जाना बाकी है. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सरकार के लिए चुनौती है, जिसे बहाल करनी है. शिक्षा ऐसी न हो जिससे सिर्फ बच्चों को सिखाया जाये, बल्कि शिक्षा ऐसी हो कि उनकी प्रतिभा निखर कर सामने आये. पहले स्कूलों में लड़कियों की संख्या काफी कम थी। 2007 से पोशाक योजना, फिर नौवीं की छात्राओं के लिए साइकिल योजना शुरू हुई, तो उनकी संख्या लड़कों से भी बढ़ गई। पहले 1.70 लाख छात्राएं थीं, जो 7 लाख पार कर गई।

नीतीश कुमार ने आगे कहा बिहार में शिक्षा की जो भी स्थिति हो, लेकिन देश में किसी भी संस्थान में नामांकन हो या फिर किसी नौकरी में सबसे ज्यादा बिहार के युवा शामिल होते हैं और सबसे ज्यादा सफलता प्राप्त करते हैं. हमें अपने युवाओं की प्रतिभा पर पूरा भरोसा है. हमें विश्वास है कि नये ढंग से शिक्षा का विकास होने पर हमारे युवा और भी मेधावी होकर उभरेंगे और बिहार फिर से अपने ज्ञान की भूमि को प्राप्त करेगा.

शिक्षा का मतलब सिर्फ क्लास में बैठकर बच्चों को पढ़ाना नहीं है। हमें प्राकृतिक रास्ते की ओर चलना चाहिए। इस क्रम में उन्होंने प्रकृति से हुए छेड़छाड़ के दुष्परिणाम की चर्चा करते हुए स्मॉग पर भी अपनी बात कही। उन्होंने कहा कि बिहार में भी दो-तीन स्मॉग की स्थिति रही। कुदरत के साथ छेड़छाड़ नहीं करना चाहिए। सुविधा के लिए प्रकृति से छेड़छाड़ आत्माघाती है। शिक्षा में यह बड़ी ही बुनियादी चीज है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा का मतलब है सबकी शिक्षा। बिहार में लड़कियों के स्कूल जाने से सामाजिक परिवर्तन हुआ है। बिहार के युवाओं पर उन्हें यकीन है। देश में चाहे किसी भी प्रकार की परीक्षा हो उसमें सबसे अधिक उत्तीर्ण होने वाले बिहारी युवा ही होते हैं।

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