1759 में बिहार के पटना में पैदा होने वाले शेख़ दीन मोहम्मद मुर्शिदाबाद के नवाबों के घर पैदा हुए थे . उनके पिता ने ईस्ट इंडिया कंपनी में बंगाल आर्मी के कप्तान के पद पर काम किया था . शेख़ दीन मोहम्मद भी 11 साल के उम्र में सेना में भर्ती हो गए और 1782 तक सेना में काम करते रहे .

1782मे जब शेख़ दीन मोहम्मद के सबसे अच्छे दोस्त इवांस बेकर ने सेना छोड़ने और अपने देश आयरलैंड लौटने का फैसला किया तो शेख़ दीन मोहम्मद ने भी सेना से इस्तीफा दे दिया और दुनिया को देखने के लिए ‘अपने सबसे अच्छे दोस्त’ के साथ आयरलैंड जाने का फैसला किया। आयरलैंड में ही रहते हुए उन्होंने एक किताब लिखी थी जो किसी भी भारतीय की अँगरेज़ी में प्रकाशित पहली किताब है–” द ट्रेवल्स ऑफ़ दीन मोहम्मद ” बाद में उन्होने दूसरी किताब लिखी जो 1820मे आई . उनकी दूसरी किताब जिसका शीर्षक है” द बेनिफिट्स रिज़ल्टिंग फ्रॉम दी यूज ऑफ इंडियन मेडिकेड वापोर बाथ ”

जिसके बाद वो लंदन आ गए जहाँ उन्होंने कुछ दिन अलग अलग जगह पे जैसे की भाप स्नान और मालिश के पार्लर में भी नौकरी की . जिसके बाद उन्होने लंदन में रेस्तराँ खोला जो की किसी भी दक्षिण एशियाई द्वारा खोला गया पहला रेस्तराँ था .रेस्तराँ का नाम ‘हिंदुस्तानी कॉफी हाउस’ था ..रेस्तराँ में भारतीय खाने के अलावा, भारतीय हुक्का भी पेश किया जाता था. हालॉकि उनका रेस्तराँ कुछ समय चलने के बाद बंद हो गया लेकिन उसके बाद ब्रिटेन में भारतीय रेस्तराँओं की भरमार हो गई. जिस जगह उनका रेस्तराँ था वहाँ अब कार्लटन हाउस नाम की इमारत है.

रेस्तराँ खोलने के दो साल बाद ही दीन मोहम्मद दीवालिया हो गए लेकिन कुछ वर्ष बाद ही उन्होंने दोबारा मसाज पार्लर का कारोबार ब्राइटन में शुरू कर दिया. और ब्राइटन में ही उनकी मौत 1851 में हुई .

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