बैद्यनाथधाम मंदिर, भारत में बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक, की गिनती झारखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में होती है। इस मंदिर की स्थापना के पीछे एक बहुत प्रसिद्ध कहानी है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव ने रावण की प्रार्थना से प्रभावित उसे एक शिवलिंग दिया था, जो रावण को अपने राज्य तक अपनी यात्रा बाधित किये बगैर ले जाना था।
देवता दिव्य शिवलिंग को शत्रु राज्य को दिये जाने से प्रसन्न नहीं थे और इसलिए भगवान विष्णु एक ब्राह्मण का रूप धारण कर लिया तथा रावण से सफलतापूर्वक शिवलिंग छुड़ा दिया, और इस प्रकार यह देवघर में छूट गया।
मंदिर की स्थापना वर्ष 1596 में की गई। खोया हुआ शिवलिंग बैजू नाम के एक आदमी को मिला था और उसके बाद इसका नाम बैद्यनाथ मंदिर रखा गया। पुराणों में भी बैद्यनाथ को महत्व दिया गया है। यह एक शक्तिपीठ भी है। नौलखा मंदिर भी नजदीक ही स्थित है।
हर साल प्रसिद्ध श्रावणी मेला झारखंड में आयोजित किया जाता है तथा हजारों श्रद्धालु इस 30 दिवसीय महोत्सव के दौरान उत्तरप्रदेश, बिहार,झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूरे देश के विभिन्न भाग से लोग बिहार के सुल्तानगंज से गंगा नदी के पवित्र जल ले कर के वाहा से 105 किमी दूर बैद्यनाथधाम मंदिर की यात्रा करते हैं। भगवान शिव के भक्त शिवलिंग पर पवित्र जल अर्पण करते हैं।


हालांकि इस स्थान के आस-पास छोटी-मोटी दुकानें व भोजनालय, जो विभिन्न व्यंजन एवं स्थानीय मिठाई पेड़ा बेचते हैं, पर यह का प्रसाद पेडा पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। पर्यटकों के यहां भ्रमण हेतु एक प्रमुख आकृषण है। मंदिर सुबह को 4 बजे खुलता है तथा रात में 9 बजे बंद होता है।

जय बाबा बैजनाथ।।

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