आज जब सुबह सुबह अखबार पढ़ रहा था तो दैनिक जागरण में एक शानदार स्टोरी पढ़ने को मिला .. और वो स्टोरी था बिहार के नालंदा की पूजा भारती की .. केमिकल इंजीनियर पूजा ने भारत सरकार की प्रतिष्ठित नवरत्न कंपनी गेल में छह साल नौकरी की। पैकेज था, करीब बीस लाख। जिंदगी पटरी पर थी, पर दिल कुछ और चाहता था। उन्होंने दिल की बात सुनी और नौकरी छोड़कर किसान बन गईं। ओडिशा में जैविक खेती से तगड़ा मुनाफा कमा रहीं पूजा दूसरे किसानों को भी इसके गुर सिखा रही हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त करके किसानी को हेय मानने वाले युवाओं के लिए यह लड़की रोल मॉडल बन चुकी है। खासकर उन ग्रामीण युवाओं के लिए जिनका खेती से मोह भग हो रहा है और छोटी-मोटी नौकरी के लिए शहरों को पलायन कर रहे हैं।

पूजा बताती हैं, उच्च डिग्री लेकर युवा बड़े शहरों में 10-15 हजार रुपये की नौकरी पर सघर्ष कर रहे हैं। हम ऐसे युवाओं को अपने गाव लौटकर खेती करने के लिए आमत्रित कर रहे हैं। पूजा बताती हैं, मेरा उद्देश्य खेती के अच्छे दिन वापस लाना है। किसानों को बताना है कि उनकी खेती सबधी समस्याओं का समाधान प्रकृति में ही है, न कि हानिकारक केमिकल में। पूजा के मॉडल से प्रभावित होकर एक अन्य आइआइटियन मनीष भी उनके साथ जुड़ गए हैं। वैशाली के मनीष ने पूजा के साथ खड़गपुर आइआइटी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी।

नहीं थी नौकरी में आत्मसतुष्टि.. पूजा भारती बताती हैं, नौकरी जरूर प्रतिष्ठित सस्थान में कर रही थी, लेकिन मैं खुद से सतुष्ट नहीं थी। इसलिए नौकरी करके पहले कुछ पैसे जमा किए। इसके बाद 2015 में नौकरी को अलविदा कह दिया। खेती में रुचि थी लिहाजा असम और मध्य प्रदेश घूमकर विशेषज्ञों से जैविक खेती के गुर सीखे। इसके बाद ओडिशा जाकर करीब तीन एकड़ जमीन खरीदी और वहा खेती शुरू कर दी। किसानों को समझाया कि आप जैविक तरीके से खेती कीजिए। इसमें उपज रासायनिक खादों से अधिक होती है और खेत की मिट्टी भी सुरक्षित रहती है। किसानों को जब खुद मैंने प्रैक्टिकल कर दिखाया तो उन्हें भरोसा हुआ। अब वे भी जैविक खेती की ओर प्रेरित हो रहे है।

( आज के दैनिक जागरण अख़बार से साभार )

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