राम मंदिर के निर्माण का मामला भले ही अभी अदालतों में लटका हो, लेकिन बिहार के सीतामढ़ी जिले में सीता की जन्मस्थली को विकसित करने और उसे धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का कार्य इसी माह शुरू होने जा रहा है। महत्वपूर्ण है कि खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इस कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए अपनी मंजूरी दे दी है . इस कार्यक्रम में देश भर के सभी सांसदों और विधायकों को भी आमंत्रित किया गया है।

इसकी पहल करने वाले बीजेपी उपाध्यक्ष और सांसद प्रभात झा ने हालांकि कहा है कि यह बीजेपी का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि उन्होंने इस मंदिर के लिए व्यक्तिगत तौर पर पहल की है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी कार्यक्रम में आना स्वीकार किया है। उसी दिन यानी 24 अप्रैल को मुख्यमंत्री सीता की जन्मस्थली पुनौरा धाम के जीर्णोद्वार का ऐलान करेंगे। बिहार में हाल ही में हुई सांप्रदायिक हिंसा से उपजे राजनीतिक टकराव के बीच इस कार्यक्रम के कई राजनीतिक अर्थ भी निकाले जा रहे हैं। घटनाओं के बाद वहां राजनीतिक स्तर पर भी टकराव होता नजर आया है। इस टकराव को बीजेपी और जेडीयू के बीच बढ़ती दूरी के रूप में देखा गया है। ऐसे में अगर जानकी मंदिर के जीर्णोंद्वार के लिए आयोजित कार्यक्रम में नीतीश कुमार खुद मौजूद रहते हैं, तो इसे बड़े राजनीतिक डिवेलपमेंट के रूप में देखा जा सकता है।

बीजेपी उपाध्यक्ष का कहना है कि जानकी मंदिर के जीर्णोद्वार के लिए जो भी कदम उठाए गए हैं, वे मुख्यमंत्री के प्रयासों से ही संभव हुए हैं। मुख्यमंत्री यह भी मान चुके हैं कि नालंदा विश्वविद्यालय की तर्ज पर इस मंदिर के प्रांगण को भी विकसित किया जाए और इसे ऐसा स्थल बनाया जाए, जो पांचवें धाम के रूप में पहचाना जाए।

( 10 अप्रैल के नवभारत टाइम्स में प्रकाशित खबर )

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