ऐसा लगता है की अपने राज्य की बिहार पुलिस ने ”पेड़ बचावो” अभियान को ज्यादा ही गंभीरता से ले लिया है.और कागज बचाने के लिए आजकल FIR हाथ पर दर्ज करने लगी है.बहरहाल हम ये नहीं, बल्कि बिहार पुलिस के कारनामे कह रहे हैं.अपराध और अपराधियों पर नकेल कसने में अक्षम बिहार पुलिस के एक ऐसे ही कारनामे के चर्चा आज चारों ओर हो रही है. हुआ ये कि एक घटना पर मौके पर गई पुलिस ने जब लोगोँ के बयान दर्ज करने शुरू किए तो उनके पास कागज ही नहीं थे. पुलिस ने अपनी कर्मठता दिखाते हुए लोगों के बयान और घटना की पूरी वारदात हाथों पर ही लिख डाली.

मामला था, गरीबों के अनाज की कालाबाजारी के मामले को लेकर लोगों ने राशन के चावल से लदी गाड़ी को पकड़ कर पुलिस को सूचना दी.  पुलिस मौके पर पहुंची तो जरूर लेकिन मामला दर्ज करने के बजाए पुलिसकर्मियों ने अपने हाथों पर ही लोगों का बयान लिखना शुरू कर दिए.

वैशाली जिले का करताहा बेहद पिछड़ा और गरीब इलाका है. आरोप है कि अधिकारियों और पुलिस की मिलीभगत से गरीबों को मिलने वाला अनाज बेच दिया जाता है. इस बार जब लोगों ने चोरी छिपे अनाज की कालाबाजारी होते देखी तो अनाज से लदी गाड़ी को पकड़ लिया. लोगों ने पुलिस को इस उम्मीद से बुलाया था कि पुलिस उनकी शिकायत सुनेगी और कोई कार्रवाई करेगी. लेकिन मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारयों का लोगों की शिकायत दर्ज करने का तरीका  उन्हें उनके साथ मजाक लगा.

जांच के लिए पहुंचे करताहा थाना के प्रभारी सबरेंद्र कुमार लोगों की शिकायत बेशक सुनते दिखे लेकिन शिकायत डायरी या कागज़ पर दर्ज करने के बजाए अपने हाथों पर लिख कर चले गए. ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस की मंशा ठीक नहीं है तभी तो हाथों पर शिकायत लिख कर चली गई.

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