रामलला के मंदिर को लेकर कई कहानियां है.कई लोग अयोध्या में मंदिर बनने को लेकर अपने-अपने स्तर पर दावा करते हैं.भगवान राम और माता सीता का रिश्ता बिहार और यूपी से जुड़ा है.वैसे ही अयोध्या में राम मंदिर की नींव रखने की कहानी भी बिहार से जुड़ी है.

भगवान राम का रिश्ता बिहार से काफी गहरा रहा है.ये रिश्ता भवान राम के के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा है क्योंकि उनकी पत्नी सीता बिहार के सीतामढ़ी की रहने वाली थीं.तबसे लेकर सीतामढ़ी और अयोध्या के रिश्ते को प्रगाढ़ माना जाता है.

जब अयोध्या में राममंदिर के बनाने के लिए संघर्ष चल रहा था. तब विश्व हिन्दू परिषद के आहवान पर राममंदिर के लिए करोड़ों लोग ईंट को लेकर अयोध्या पहुंच रहे थे ताकि राम मंदिर का निर्माण हो सके.इस राम मंदिर के निर्माण के लिए बिहार से कामेश्वर चौपाल भी अयोध्या पहुंचे.

उस वक्त कामेश्वर चौपाल संघ में संयुक्त बिहार के सह सचिव थे.उनके नेतृत्व में गया और झारखंड से ईट लेकर हजारों लोग अयोध्या पहंच गए.नौ नवम्बर 1989 को राम मंदिर के शिलान्यास करना था.तभी ये घोषणा हुई कि सीतामढ़ी के हरिजन परिवार से आने वाले कामेश्वर चौपाल पहली ईंट रखकर रामलल्ला के मंदिर का शिलान्यास करेंगे.इस बात बोलकर कामेश्वर चौपाल अपने बुढ़ापे में जोश भर रहे है और अपने आप को खुशनशीब मानते हैं.

कामेश्वर चौपाल बताते है कि राममंदिर की लड़ाई कांग्रेस ने ही शुरु की थी.कांग्रेस नेता लगातार युपी में राममंदिर को लेकर संघर्ष कर रहे थे.लेकिन उनके आलाकमान ने कभी राम को नही अपनाया था.जिस रामलल्ला के मंदिर में ताला लगा दिया गया था उस रामलल्ला के मंदिर को 1986 में बंधन से मुक्त किया गया.

उस वक्त देश के पीएम राजीव गांधी थे .चौपाल इस बात को भी बताते हैं कि गांधी को कांग्रेस ने अपनाया.लेकिन गांधी के राम को अपनाने की हिम्मत नहीं रही कांग्रेस में.वहीं उन्होंने कहा कि जब राजीव गांधी ने अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत की थी तो अयोध्या से की थी और कहा था कि देश में रामराज्य लाना है.

भारत के संविधान को दिखाते हुए कामेश्वर चौपाल कहते है कि संविधान ने जब राम को अपनाया है .उसमें जब राम, लक्ष्मण और सीता की तस्वीर है तो फिर राम मंदिर के खिलाफ लोग क्यों बोलते हैं.इस संविधान में उस समय के सभी नेता ने हस्ताक्षर किया था.

फिर अब राम से विरोध क्यों. कामेश्वर चौपाल राम मंदिर के कोर्ट के फैसले को भी राजनैतिक मानते हैं .उनका कहना है कि जब देश में आतंक संकट को लेकर कोर्ट रात के 12 बजे खुल सकता है तो फिर राम मंदिर के फैसले मे देरी क्यों.जब कोर्ट के फैसले को सर्वोपरी माना जाता है तो फिर राम मंदिर में बाहर फैसला क्यों.

उनका कहना है कि जब वो जवान थे तो उन्होने राम मंदिर का शिलान्यास किया था अब तक राम मंदिर नहीं बना.लेकिन जैसे ही कोर्ट का फैसला आएगा मात्र 6 घंटे में मंदिर बन कर तैयार हो जाएगा.सबकुछ तैयार हो चुका है और टेक्नोलॉजी के जरीये मात्र 6 घंटे में मंदिर तैयार होकर खड़ा हो जाएगा.

कामेश्वर चौपाल कहते कि राम मंदिर का मसला ना तो कांग्रेस का है और ना ही बीजेपी का है.ये भारत के हिन्दुओं से जुडा मामला है.विश्व हिन्दू परिषद ने इसे शुरू किया था.बीजेपी ने बस समर्थन किया था.अब मंदिर बन कर रहेगा.सबकुछ तैयार है।

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