अभी कुछ ही दिन हुआ तिलेसर तिवारी के मझिला बेटा ‘तेगा तिवारी’ उर्फ़ ‘मंगरु’ को प्राइमरी में मास्टर हुए। जिस दिन जॉइनिंग लेटर आया उसी दिन तिवाराईन मईया नें पांच रूपिया का ‘धार’ डीह बाबा को चढ़ा दिया। पूरा सेर भर दूध का खप्पर काली माई के चउरा पर भी चढ़ा दिया गया।
मँगरू के समय में मोलायम चाचा की सरकार थी। इसलिए मँगरू हाई स्कूल अउर इण्टर, दूनो में पचासी परसेंट लाँघ गए।तीन -पांच करके ग्रेजुएशन में भी ठीक -ठाक नम्बर आ गया। एक दिन तिवारी बाबा के एक शुभचिंतक जजमान नें सुझाव दिया कि, ‘ ए महाराज मँगरू का मेरिट बढ़िया है, काहे नाही बीटीसी करने को कहते हैं। दक्खिन टोला के रामदुलारे सिंह का कॉलेज है, बढ़िया मेरिट उठेगा। आ खोरहट के देई माई चाह दीं, तो मँगरू को मास्टर बनने से कोई नहीं रोक पाएगा।
ख़ैर, खोरहट की देई माई ने तिवारी बाबा की गुहार सुन भी ली और मँगरू मास्टर हो गए।
ई सब तो हम आपको केवल जानकारी के लिए बता रहे थे। असली कहानी तो अब शुरू होती है।
कुछ दिन से तिलेसर तिवारी के दुआर पर तिलकहरुओं की लाइन लगी है। का नोटबंदी के समय बैंक में लें लगता था। उहो फेल है।
तिवारी बाबा भी बहन कु0 कायावती की तरह एकदम रटा-रटाया वक्तव्य तैयार कर लिए थे। जो भी आता बस चालू हो जाते:-
देखिये, लड़के का बियाह तो हमको करना ही है। आज नहीं तो काल्ह करें। आजकल सरकारी नौकरी वाले लड़के मिल कहाँ रहे हैं। आप तो जानते ही हैं कि प्राइमरी का मास्टर होना कितनी बड़ी बात है। देवता भी ऐसी नौकरी के लिए स्वर्ग छोड़ने को तैयार हैं । क्या ठाठ की नौकरी है, जब मन करे तब इस्कूल जाइये, आ जब मन करे चल दीजिये। महीना पूरा होते चालीस हज़ार रूपया आपके खाता में। केवनो फ़ौज वालों की तरह जान हथेली पर लेके थोड़े ही चलना है। इसीलिए तो फौजियों का रेट गिर गया है। बगले के महेन्दर मिसिर का लड़का बीएसएफ में है। कोई बियाह करने को तैयार ही नहीं हो रहा था। ……..ऊ तो हमरे साढू किसी तरह तिगड़म लगा के बियाह कराये। गरीब घर की लड़की थी।……
भाई साहब देखिये, ई सब कहने का मतलब यही था कि प्राइमरी का मास्टर मने ‘राजा’ । अब राजा की बियाह में राजा जईसा खरचा भी होगा। और उसमें भी डाल-वाल, गहना-गुरिया, जो भी आप देंगे ऊ तो अपनी बेटी को ही देंगे न। हमको बस दुआर का खर्चा जो है ‘पंद्रह लाख रूपया’ और एक ठो फोर व्हीलर दे दीजिए। बाकी हम आपसे कुछ माँग थोड़े ही रहे हैं। ई तो रेट हो गया है। बाकी आप भी समाज में घूम रहे हैं, जानते ही होंगे।”
इतना कहने के बाद ही तिवारी बाबा साँस लेते।
अब आप तो जानते ही हैं ‘ मजबूरी का दूसरा नाम बेटी का बाप’।
ख़ैर, मँगरू का बियाह तय हो गया। लड़की का नाम वैदेही तिवारी। इलाहबाद यूनिवर्सिटी से एम०ए० थी और सिविल सर्विस एस्पिरेन्ट थी।
देखउटी का दिन रखाया। शीतला माता मंदिर में आना तय हुआ।
उक्त तिथि पर दोनों पक्ष शीतला मन्दिर में उपस्थित हुए। इधर तिलेसर तिवारी सोच रहे हैं कि….माड़ो हिलाई में का माँगा जाये।
बातचीत चल ही रही थी कि वैदेही नें मँगरू से बात करने की इच्छा ज़ाहिर की। ………अब दोनों तालाब के किनारे टहल रहे थे…..
वैदेही ने पूछा, “व्हाई हैव यू चोज़ेन टीचिंग एज योर करियर ऑप्शन?
……….मँगरू बस इतने समझ पाए की कुछ आँग्ल भाषा में कहा गया है। बाकी कुछ पल्ले नहीं पड़ा।…..तब तक दूसरा सवाल….जैसे तोप से गोला दागा जाता है, वैसे ही मँगरू पर दाग दिया गया।
“व्हाई आर यू नॉट सेयिंग एनीथिंग?………यू मस्ट वाना रिमूव द डार्कनेस ऑफ़ इल्लिटरेसी फ्रॉम आवर कंट्री…….
मँगरू का मुँह एकदम धुँआ…..कुछ समझ में आये तब न बोले।….मँगरू का अंग्रेजी से एकदम भवह- भसुर वाला रिश्ता था। ……..
वैदेही को बात समझने में तनिक भी देरी न लगी। ….वो तुरन्त अपने पिता जी के पास आई और बोली, “पिताजी मुझे किसी ऐसे आदमी से शादी नहीं करनी जो ना जाने कितने गरीब माँ बाप के सपनों को उजाड़ रहा है। जो ख़ुद नक़ल और घूस के बल पर नौकरी पा गया हो……वो क्या भला ज्ञान बाँटेगा…. आप जल्दी से सामान पैक करिये, अब मैं यहाँ एक मिनट भी नहीं रुकना चाहती।………इस वक़्त तिलेसर तिवारी का मुँह देखने लायक था।…..ऐसा लग रहा था चुनाव हारने के बाद अक्लेश भईया प्रेस कॉन्फ्रेंस में बैठे हों।……उधर वैदेही के कहने की देरी थी…..सामान पैक…..सारा सामान गाड़ी में।….. तिवारी जी का खेमा भी अपने लाव लश्कर के साथ लौट आया।……..अब तो तिवारी बाबा को दिनही में तरई लउक रहा था।….मँगरू नाक कटा दिए। …..अरियात- करियात में हल्ला हो गया…..की मँगरू मास्टर को लड़किये रिजेक्ट कर दी है। …..तिवाराईंन का साँसत था….जौने गोतीन आती उहे चार बात कह के निकल जाती….” ढेला पर चढ़ के ऊँच बनल रहल ह लोग”…..
माई बाप को तो फिर भी उम्मीद था…की यहाँ नहीं तो कहीं और सही।
लेकिन मँगरू का तिलकहरू वाला खिस्सा तो जग जाहिर हो गया।
आप लोग भी तैयारी करते रहिए….जैसे ही मँगरू का बियाह तय होगा…….नेवता पहुँच जायेगा।

( विकास मिश्रा जी के कलम से )

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