मोदी सरकार  ने आम आदमी और छोटे व्‍यापारियों के हितों में बड़ा फैसला लिया है. उसने करीब 177 से अधिक प्रोडक्ट्स पर टैक्‍स दरों में कटौती कर दी है. अब सिर्फ 50 प्रोडक्ट्स पर ही 28 फीसदी जीएसटी लगेगा. बाकी प्रोडक्ट्स पर टैक्स घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है. जिन उत्‍पादों पर टैक्‍स कम किया गया है, उनमें ज्यादातर एफएमसीजी प्रोडक्ट्स हैं. ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर टैक्स घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है. 28 फीसदी टैक्स स्लैब में से 12 आइटम्स को हटाया गया है.

20000 करोड़ कम होगा राजस्‍व
इस साल एक जुलाई को जीएसटी के क्रियान्‍वयन के बाद से यह सबसे बड़ा बदलाव है. माना जा रहा है कि जीएसटी काउंसिल के आज के फैसले से सरकार के राजस्व में सालाना 20,000 करोड़ रुपये की कमी आएगी. बिहार के उप-मुख्‍यमंत्री सुशील मोदी ने गुवाहाटी में चल रही जीएसटी काउंसिल की 23वीं बैठक के अवसर पर ये जानकारियां दीं.

 

जीएसटी की टेक्नॉलजी संबंधित गतिविधियों को मॉनिटर करने के लिए बनाए गए ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स में 5 सदस्य हैं, जिसके प्रमुख सुशील कुमार मोदी हैं। मोदी ने कहा कि हर घर में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले सामानों, जैसे सैनेटरी, सूटकेस, वॉलपेपर्स, प्लाईवुड, स्टेशनरी आर्टिकल, घड़ी, प्लेइंग इंस्ट्रूमेंट्स आदि आइटमों पर सरकार भारी छूट का ऐलान कर सकती है। इन आइटमों पर टैक्स में छूट का उद्देश्य छोटे व्यापारियों और कन्ज्यूमर्स को राहत देना है।

सुशील मोदी ने बताया कि पहले 62 आइटमों को सबसे उच्च कर वाले दायरे में रखा जाना था, लेकिन मीटिंग में काफी चर्चा के बाद कुछ और आइटम उस कैटिगरी में से कम किए गए। अब सिर्फ 50 आइटमों पर ही 28 पर्सेंट टैक्स लगेगा। उन्होंने बताया कि आफ्टर शेव, डिओड्रेंट, वॉशिंग पाउडर, ग्रेनाइट और मार्बल जैसे आइटमों पर अब 18 पर्सेंट टैक्स लगेगा। मोदी ने जीएसटी काउंसिल के इस फैसले को एतिहासिक बताया।

क्या होगा सस्ता
बताया जा रहा है कि मीटिंग में फैसला हुआ है कि सैनेटरी, सूटकेस, वॉलपेपर्स, प्लाईवुड, स्टेशनरी आर्टिकल, घड़ी, प्लेइंग इंस्ट्रूमेंट्स, आफ्टर शेव, डिओड्रेंट, वॉशिंग पाउडर, ग्रेनाइट और मार्बल जैसे कई उत्पाद अब 18 पर्सेंट वाले दायरे में आएंगे।

क्या सस्ता नहीं 

वहीं यह भी कहा जा रहा है कि पेंट, सीमेंट, वॉशिंग मशीन, फ्रिज और तंबाकू जैसे सामानों पर कोई राहत नहीं मिली है।

गौरतलब है कि जीएसटी लागू होने के बाद से ही जरूरी उपयोग की वस्तुओं पर ज्यादा टैक्स वसूलने को लेकर सरकार की काफी आलोचना हो रही थी। जिसके बाद सरकार द्वारा इन वस्तुओं पर टैक्स कम करने की उम्मीद पिछले कुछ समय से जताई जा रही थी।

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