जनेऊ, आजकल राजनितिक गलियारे में अचानक से हिंदुत्व और सनातनधर्म के एक प्रतिक जनेऊ ट्रेंड कर रहा है, जनेऊ क्या है ये तो हर हिन्दू जानते है फिर भी कोई इन्हे नहीं  जानते हो तो सबसे पहले संछिप्त में बता दूँ,  ब्रह्मण, क्षत्रिय और वैश्य में यज्ञोपवीत संस्कार यानी जनेऊ की परंपरा है। लड़के के दस से बारह वर्ष की आयु के होने पर उसकी यज्ञोपवीत संस्कार किया जाता है। पूर्व काल में जनेऊ पहनने के पश्चात ही बालक को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार मिलता था। जनेऊ तीन धागों वाला एक सूत्र होता है। जनेऊ को संस्कृत भाषा में यज्ञोपवीत कहा जाता है। इसे यज्ञोपवीतधारी व्यक्ति बाऐं कंधे के ऊपर तथा दाईं भुजा के नीचे पहनता है।
उपनयन संस्कार के वक्त लड़के को सबसे पहले गायत्री मंत्र सिखाया जाता है, जनेऊ में तीन धागे होते हैं। जो तीन प्रकार के ऋणों के प्रतीक हैं पितृ ऋण, गुरु ऋण और गृहस्थ ऋण। जनेऊ के तीन धागे तीन देवी, पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती का प्रतीक भी हैं। यह इस बात के  प्रतीक हैं कि मनुष्य सिर्फ इन तीन देवियों की शक्ति, धन और ज्ञान की मदद से अपनी ज़िन्दगी में सफल हो सकता है। जनेऊ धारण करने के बाद उस व्यक्ति को अपने विचारों, शब्दों और कामों में पवित्रता रखनी चाहिए। जनेऊ बदलते समय यदि कोई मंत्र न याद हो तो सामान्य रूप से गायत्री मंत्र का जाप किया जाता है। अन्यथा यह मंत्र सामान्य रूप से प्रचलित है।,
अब आते  है राजनितिक जनेऊ पर , जनेऊ को धारण करने से पहले विधि विधान और पूजा पद्धति है ,  राहुल जी कब उपनयन संस्कार करवाकर जनेऊ धारण किये ये भी एक बड़ा सवाल है ,  सिर्फ वोट बैंक के लिए राजनितिक जनेऊ पहने से कोई जनेऊधारी नहीं होता , हिन्दू है या नहीं ये उनका व्यक्तिगत मामला है धर्म की आज़ादी सबको है वो किसी भी धर्म को माने, पर देश को जनेऊ दिखा कर वेबकूफ बनाने से पहले बताये की उपनयन संस्कार कब करवाए ?  अचानक से कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गाँधी जनेऊधारी सनातनी बन गए है पिछले 2 महीने में 22 बार हिन्दू मंदिर के चक्कर लगा लिए  है, कल के हुए मंदिर विवाद में राहुल गाँधी जी जनेऊधारी हिन्दू बना दिए गए , ये अलग बात है की इससे पहले कभी भी त्रुस्टीकरण की राजनीति में जनेऊ नहीं पहने , क्योकि  कांग्रेस पार्टी आज़ादी के समय से ही  अल्पसंखयक वोट बैंक की राजनीती करती आयी है उन्हें लगता था की यही वो समुदाय है जिनपर उनका एकमत अधिकार और भरोषा है इन्ही की वजह से सत्ता पर काबिज रह सकते है ,  पर अब ये मिथ्या टूट गया है,  वोटर जागरूक हो रहे  है जाती धर्म के बंधन से निकलकर अब विकाश की बात करते है उन्ही को वोट करते है जो विकाश की बात करते है , 2014 लोकसभा और हाल ही में हुए उत्तरप्रदेश के चुनाव जिसका जीता जगता उदहारण है ,
आज राहुल गाँधी जनेऊ धारी हिन्दू बन गए क्योकि चुनाव गुजरात में है जहाँ मुस्लिम मतदाता सिर्फ 9 प्रतिसत है, अगर 20% तक भी होता तो आप लोग जानते ही है क्या हो सकता था और क्या पहनकर वो आते थे , कुछ महीने पहले ही केरल में एक गौ के बछड़े को काटकर खाया था ये जनेऊधारी, और बेसर्मी की हद तो तब हो गयी थी जब ये फेसबुक पर लाइव  गऊ माता जो की सनातन धर्म में पूजनीय है, उनको काटा था और पकाया भी था,
वैसे तो इस जनेऊधारी पार्टी के बहुत से कारनामे है जो इसे सत प्रतिसत सनातनी हिन्दू बनाती है
जैसे याद कीजिये , 2014 का लोकसभा चुनाव इस चुनाव से पहले जनेऊधारी राहुल जी के माता जी दिल्ली के इमाम बुखारी के चौखट तक गयी थी मुस्लिम वोट के लिए ! क्या ये बात साबित नहीं करती राहुल गाँधी जी को जनेऊधारी हिंदु ?
UPA 2 में तत्कालिक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी ने कहा था देश के संप्रदा पर पहला हक़ मुसलमानो का है , उस वक़्त  राहुल जी जनेऊधारी नहीं थे सायद, अगर जनेऊधारी हिन्दू होते तो पूछते  मनमोहन सिंह जी से किस हक़ से या किस कानून के तहत उनका हक़ पहला है ?
दिगवंत पूर्व प्रधानमंत्री  राजीव गाँधी जी भी  हिंदुत्व होने का सबूत दे चुके है  बात उस वक्त है कि जब राजीव गांधी कांग्रेस पार्टी के कार्यक्रम में शामिल होने कश्मीर गए हुए थे। इस कार्यक्रम में राजीव गांधी के साथ फारूक अब्दुल्लाह और वरिष्ठ लेखक एम के रैना भी उपस्थित थे जब कार्यक्रम के दौरान फारूक अब्दुल्लाह ने राजीव गांधी को हिन्दू नेता कहकर पुकारा तो राजीव गांधी ने तुरंत कहा कि मैं हिन्दू नहीं हूँ। मेरे पूर्वज मुसलमान थे और मैं आपमें से एक हूँ, इस बयान का खुलासा एम के रैना ने अपनी किताब में भी लिखा और बाद में ट्विटर पर भी बताया,  कि राजीव गांधी ने भरी जनसभा में बिना हिचकिचाये कहा कि मैं हिन्दू नहीं हूँ और ना ही मेरे पूर्वज हिन्दू थे. ,
कांग्रेस पार्टी को हिन्दू होने का सबूत आज जनेऊ पहनकर देना पर रहा है उसका कारन भी यही है जिनके पूर्वज खुद कन्फ्यूज्ड थे की वो हिन्दू है या किसी और धर्म के मानाने वाले, खैर भारत देश में हर किसी को धार्मिक आज़ादी है राहुल गाँधी किस धर्म को मानते है ये उनका व्यक्तिगत आज़ादी है, वो हिन्दू  है या नहीं इससे किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता वो किसी भी धर्म को माने , बस उनसे और कांग्रेस पार्टी से निवेदन है की देश की जनता को कन्फ्यूज्ड न करे ! वोट जनेऊ पहनने से नहीं मिलता वोट पारदर्शिता और विकाश से मिलता है , विकाश के नाम पर देश ने मनमोहन सिंह जी की सरकार देखा है,
नेहरू जी भी अपने हिंदुत्व को लेकर विवादित व्यान दे चुके है , नेहरू जी ने कहा था की एजुकेशन के हिसाब से मैं इंग्लिशमेन (अँगरेज़) हूँ, कल्चर के हिसाब से मैं मुस्लिम हूँ and I am a Hindu only by accident of birth , हिन्दू सिर्फ जन्म लेने के कारन हूँ, ये वचन थे देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के,
जनेऊ पहन लेने से कोई हिन्दू नहीं होता देशवासी ने आजतक कभी  सोनिया गाँधी की शादी से पहले वाली कोई भी ऐसी तस्वीर जिसमे उन्होंने सिंदूर लगाया हो, मंगलसूत्र पहना हो, या इंदिरा गाँधी की ही कोई तस्वीर जिसमे उन्होंने सिंदूर लगाया हो, मंगलसूत्र पहना हो, इंदिरा तो कश्मीरी/उत्तर प्रदेश की थी, यहाँ हिन्दू महिलाएं अनिवार्य रूप से सिंदूर और मंगलसूत्र लगाती है,  ये किस तरह के हिंदूवादी नेता है जो JNU में माँ दुर्गा को वेश्या बोलने वाले के समर्थन में खड़े रहते है , ये किस तरह के हिंदूवादी नेता है जिसने कहा था देश को सिमी और मुजाहिदीन या रेडिकल इस्लामिक से खतरा नहीं खतरा है तो भगवाधारी से, किस प्रकार के जनेऊ धारी है जो श्री राम को लिखित में काल्पनिक बताते है ?

ये किस तरह के हिंदूवादी नेता और पार्टी है जिन्होंने देश में कथित भगवा आतंकवाद को प्लांट करने में कोई कसार नहीं छोड़ी , ये किस तरह के हिंदूवादी नेता और पार्टी है जिसने भगवा वस्त्र को आतंकवाद से जोर दिया ?

भाई सवाल तो उठेंगे अगर आप अचानक से  जनेऊ पहने है तो पूर्व में किये आपके गतिविधि को देखते हुए सवाल तो उठेंगे लोग आपसे सवाल पूछेंगे , सिर्फ वोट के लिए जनेऊ का इस्तेमाल नहीं करने देंगे ये संभव नहीं  क्योकि , जनेऊ सिर्फ एक धागा नहीं है ये देश के बहुसंख्यक के धार्मिक प्रतिक है, और यही प्रतिक को बचाने के लिए पूर्वजो ने मुगलो से लड़ा है अंग्रेज़ो से भी लड़ा है इतनी आसानी से आपको इसका इस्तेमाल करने नहीं देंगे,

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