मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की शराबबंदी पर अब कोर्ट की पहली मुहर लगी है. यह उपलब्धि बिहार सरकार के नाम बांका के एसपी चंदन कुशवाहा ने दर्ज कराई है. शराब के नशे में पकड़े गए 8 लोगों के मामले का कोर्ट में स्पीडी ट्रायल कराया गया. तीन हफ्ते के भीतर सुनवाई पूरी हुई. इसके बाद आज गुरूवार 30 नवंबर को बांका के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश आलोक कुमार सिन्हा ने सभी शराबियों की सजा मुक़र्रर कर दी. बांका के इस फैसले का असर निश्चित तौर पर पूरे बिहार में जाएगा. साथ में, सरकार की कोशिश भी दूसरे जिलों में स्पीडी ट्रायल की होगी.

बांका के एसपी चंदन कुशवाहा के स्पेशल ऑपरेशन में 9 नवंबर के दिन आठ लोगों को नशे की हालत में गिरफ्तार किया गया था. पूछताछ में इस बात की पुष्टि हुई कि सभी झारखंड से शराब पीकर आये थे. डॉक्टरी जांच में गिरफ्तार सभी आठ अभियुक्तों के शराब के नशे में होने की पुष्टि हो गई. इसके बाद एसपी चंदन कुशवाहा ने तय किया कि मामले की जांच 24 घंटे में निपटाई जायेगी. इस प्रयास में पुलिस में दर्ज प्राथमिकी का सुपरविजन तय समय के भीतर किया गया. कांड के अनुसंधानकर्ता पुलिस अवर निरीक्षक श्रीकांत चौहान ने भी 24 घंटों के भीतर 10 नवंबर को कोर्ट में अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दिया.

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बांका सिविल कोर्ट (फाइल फोटो)

इसके बाद एसपी ने बांका के जिला एवं सत्र न्यायाधीश से आग्रह किया कि पुलिस तैयार है, मामले का निस्तारण डे-टू-डे की सुनवाई में कर दिया जाना चाहिए. अभियुक्तों के खिलाफ पुलिस के पास तमाम साक्ष्य भी है. एसपी के अनुरोध पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्पीडी ट्रायल के लिए तैयार हो गए. ट्रायल में सिर्फ आठ तारीखों पर अभियोजन एवं विपक्ष की ओर से बहस हुई. सरकार की ओर से पैरवी स्पेशल पीपी अवधेश कुमार सिंह ने की.

सुनवाई ख़त्म होने के बाद आज गुरुवार को फैसले का दिन था. फैसला सुनाते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश आलोक कुमार सिन्हा ने सभी अभियुक्तों को 5-5 साल की सजा मुक़र्रर की है. इसके साथ एक-एक लाख रूपये का जुर्माना भी लगाया गया है. बांका में स्पीडी ट्रायल के तहत कोर्ट के इस फैसले को बिहार में सबसे कम समय में शराबबंदी मामले में आया अदालती निर्णय माना जा रहा है.

साभार-लाइव सिटीज

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