भाई साब,बिहार की सरकार बच्चों को अब तक पुस्तक उपलब्ध न कराने के मामले में सुप्रीम कोर्ट की लताड़ झेल रही है,शिक्षकों को कई माह से वेतन भुगतान नहीं हो पा रहा है,आये दिन ये खबरें अखबारों की सुर्खियों में होती हैं।लेकिन सरकार बच्चों को शिक्षा के मंदिर में अब अतिरिक्त अंडा देकर गुणवत्ता सुधारने का प्रयत्न कर रही है।

सरकार ने प्रति बच्चे 5 रुपये अंडे या फल को तय किये हैं,अंडे का मूल्य थोक में भी 5रु से ऊपर है और चुकी सिर्फ शुक्रवार को ही देना है तो व्यापारी जिस तरह पर्व में साधारण सब्जी या फल के भाव आसमान तक पहुंचा देते हैं,शुक्रवार को अब अंडे भी ऐसे ही मिलेंगे।अब आइये फल पर,सेब/नारंगी/आम/अनार /नाशपाती आदि तो 5 रुपये में आने से रहे तो क्या सिर्फ गाजर,मूली,सुथनी,शकरकंद,केला दिया जाए?

अद्भुत सोच,अब अगर कोई कल को चिकन/मटन अपने विद्यालय में खाये तो इसे अन्यथा नहीं ही लेना चाहिए।।कुछ दशक पूर्व सरकारी विद्यालय ही शिक्षा प्रदान करने में शीर्ष पर थे परंतु अब इतने प्रयोग हो रहे हैं कि यह सिर्फ प्रयोग का अखाड़ा बन कर ही सिमट रहे हैं।।बस शिक्षकों को पढ़ाने मत दो,उनसे अंडा ख़रीदवाओ,फल मँगाओ, mdm की ख़रीद करवाओ,blo की ड्यूटी लगवाओ,और बाद में हिसाब के नाम पर व्यस्त कर दो।।

बेचारे शिक्षक दिन भर बिल बनाने और दुकान ढूंढने में ही लग जाएं।।क्या आपने पूरी जिंदगी में फल/सब्जी/किराना/ढुलाई/रंगाई/पुताई/मरम्मती/लकड़ी जलावन/मजदूरी आदि का प्रिंटेड ऑथेंटिक बिल किसी से लिया है?शायद नहीं,पर सरकारी मास्टर के पास मिलेगा।क्योंकि सरकार को तो चाहिए।।

फिर अफसरों से जांच करवाओ ताकि विद्यालय अस्त-व्यस्त हो जाये।।मुख्यमंत्री जी शिक्षकों को और विद्यालयों को प्रयोगशाला न बनाइये।।

( ऋतुराज सौरभ जी के फेसबुक वाल से साभार )

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