हमनी के रीती रिवाज आ ओकर वैज्ञानिक तर्क –
(सऊरी के अन्हरिया आ दुवारी पर के आगी)
लइकाइं से हमनी के देखत बानी जा की हमनी किहाँ हर काम काज के पीछे कौनो न कौनो रिवाज मशहूर बा आ जवना के मानला से हमनी के फायदा भी होला बाकि अब विज्ञानं के जुग में ओह सब रिवाजन के हमनी के छोड़त बानी जा बाकिर ओकरा से हमनी फायदा होता की घाटा एकरा के सोचे के समय केहु के लगे नइखे। अइसने कुल्हि रिवाजन आ ओकर विज्ञानं से सम्बन्ध पर लिखे के प्रयास कर तानी अब एहमे केतना सही भा गलत होइ ई त रउवा लोग बताएम।
पहिले के लोग जवन भी रिवाज़ बनावल ओकरा पीछे विज्ञानं रहे बाकिर आम लोग ओकरा के मानो एकरा खातिर ओकरा के धर्म आ रिवाज से जोड़ दिलहल जात रहे आ हमनी के पूर्वज ओकरा के मानत रहे लोग आ ओकर फायदा उठावे लोग… जैसे की पाहिले जब केहु मेहरारू के लइका होखे त माई आ उनका लइका भा लइकी के जवना घर में राखल जॉव ओकरा के सऊरी कहात रहे आ सऊरी घर के इंतजाम घर के बूढ़ पुरनिया अपना देख रेख में करे लोग. सउरी घर में जेतना भी खिरकी भ मोंहा रहे ओकरा के बंद कर दिहल जात रहे जवना से की ओह घर में कउनो हावा बेयार ना जाव आ ओह घर में जाये आ लइका भा लइकी के छुवे पर ढेर कुल्हि रोक रहे जवना में ईगो इहो रहे की सऊरी घर के दुवारी पर नीम के लकड़ी आ पतई जरावल जॉव आ ओहमे जाये के पहिले हाँथ गोड धो के आ दुवारी पर जरत आगी में हाँथ गोड सेंकला बाद ओह घर में केहु जाव आ लइका भा लइकी आ ओकरा महतारी के छुवे के परंपरा रहे –
आईं अब देखल जाव की ई जवन परंपरा रहे ओकर विज्ञानं में का महत्व बा –
आज विज्ञान हमनी की ई बतावता की जब केहु के लइका होला त ओह घरी परसौती के देह के सब रोम छिद्र खुल जाला आ उनका पर कौनो भी बहरी हवा बेयर के असर जल्दी होला आ जवन नवजात बच्चा होला ओकरा त एक-बा-एक नया माहौल मिलेला जवना में ओकरा बीमार होखे के संभावना ज्यादा होला बाकिर अगर ओह परसौती आ नवजात के अगर २१ दिन बहरी हावा बयार न लागे त धीरे धीरे ओह लोग के शरीर हर तरह के रोग बीमारी से लड़े लायक हो जाला एही से सऊरी घर के सब खिरकी मोंहा सब बंद कर दिहल जात रहे की ओह लोग के बहरी हवा बेयार न लागो, आ संगे संगे सऊरी के दुवारी पर नीम के आगि हरदम जरावाला के पीछे भी विज्ञानं बा – आज विज्ञानं हमनी के बतावता की नीम में एंटी वैक्टेरिअल गुण होला आ नीम के पतई भा लकड़ी के जरला से जहाँ तक ओकर धुँवा जाला ओजी के कुल्हि बीमारी के कीड़ा मर जाले एही से नीम के लकड़ी के आगि सऊरी के दुवारी पर जरावल जॉव आ जब केहु के सऊरी में जाये के होखे त उनका आपन हाँथ गोड बढ़िया से धो के आ सऊरी के दुवारी पर जरत आगि में आपन हाँथ गोड सेंकला के बाद जाये के पीछे के विज्ञानं ईहे बा की जे केहु भी लइका भा लरकोरी के लगे जाता ओकरा संगे कौनो बीमारी के कीड़ा वैक्टेरिआ लइका भा लरकोरी के लगे मत जॉव एही से ओह घर में जाये के पहीले हाँथ गोड बढ़िया से धो के फेरु नीम के आगि पर हाँथ गॉड आ देह सेंकला से ओह आदमी के देह, कपडा में अगर कौनो कीड़ा वैक्टेरिआ होखे त नीम के आगि आ धुवां से मर जाव आ लइका आ लरकोरी एकदम निरोग रहे लोग. बाकिर आज ई सब नइखे होत त ओकर असर भी लउकता की पहिले लोग के ढेर लइका होखे बाकिर लइका भा लरकोरी के बीमारी काम होखे जबकि अब के जमाना में पुरनका बात न मानला असर लउकता की लइका अलगा डाक्टर के लगे आ लरकोरी अलग डाक्टर लगे डरते रहतालो। ऐसिहिं लरकोरी ख़ातिर ढेर कुल्हि इंतजाम भी होत रहे आ ओ सब के भी आपन आपन विज्ञानिक कारन बा जवन की अगिला बार
अभी त बस सऊरी के अन्हरिया आ दुवारी पर के आगी के विज्ञान से तुलना पर रउआ लोगिन के राय आ अगर ई पसन आई त आगे के भी कहानी लिखल जाइ
जय भोजपुरी –

Leave a Reply