हिन्दू देवी-देवता के पूजा से जुडल कुछ खास बात …

हमनी के घर में रोज पूजा पाठ करेनी जा आ अपना भगवान के खुश करे के मने मने कोसिस करेनी सन। बाकिर शाश्त्र में कहल गइल बा की हमनी के पूजा करे घरी कुछ खास बात के धयान राखल जाव त हमनी के आराध्य देवता के खुश कर सकेनी — यह पर हिंदी में त बहुत लिखाइल बा बाकिर भोजपुरी में कहीं ना देखनी ह त सोचनी ह की एकरा के भोजपुरी में लिखल जाव। कौनो खास किताब भा लेख में से नइखे लियाइल की ओकर नाम दिहल जाव
हमनी के धर्म ग्रंथन में कुछु खास फूल आ सामान के कुछ विशेष देवता के चढावल मना बा। पूजा करे से जुडल कई गो अइसन बात बा जवना के ध्यान राखल बहुत जरूरी होला –

१. सूर्य, गणेश, दुर्गा, शिव आ विष्णु जी के पंचदेव कहल गइल बा। सुख के इक्छा रखे वाला आदमी के रोज ए पांचो देवता के पूजा करे के चाही आ कौनो शुभ काम करे के पाहिले त इंहा के पूजा एकदम जरूरी होला.

२. शिवजी के पूजा में कबो केतकी के फूल से ना करे के चाही, ई फूल से शिवजी के पूजा माना बा। सूर्यदेवता के पूजा में अगस्त्य के फूल माना बा आ गणेश भगवान के कबो तुलसी के पत्ता न चढ़ावे के चाहिं.

३. सबेरे सबेरे नहइला के बाद जे आदमी देवता खातिर फूल तुर के चढ़ावेला ओकरा से देवता खुश होनी आ ओकरा के ग्रहण करेनी। बाकिर बिना नहइले जे केहु तुलसी के पतई तुरेला आ भगवन पर चढ़ावेला ओकरा के देवता ग्रहण ना करेनी अइसन वायु पुराण में लिखल बा.

४. देवता के पूजा में कानी अंगूरी के पाहिले वाला अंगूरी से टिका लगावे के विधान ह। आ देवता के पूजा खातिर घीव के दिया अपना बांया और आ तेल के दिया अपना दाहिना और रखे के चाहि.

५. पूजा में देवता के धुप, दिया देखावल आ कुछ भोग लगावल जरूरी होला। देवता के लगे जरत दिया के कबो अपने से न बुतावे के चाहीं।

६. पूजा करे में बसिया पानी, बसिया फूल आ बसिया पतई ना चढ़ावे के चाहीं। शाश्त्र कहेला की गंगाजल, बेलपत्र, तुलसीपत्र आ कमल कबो बसिया ना होला।

७. भगवन सूर्य के सात बार, श्रीगणेश जी के तीन बार, विष्णु भगवन के चार बार आ भगवान शिव के आधा परिक्रमा करे के चाहिँ.

८. पूजा करे वाला जगह पर चप्पल जूता पहिन के न जाये के चाहीं आ पूजा करे के समय अपना लगे चमड़ा के बेल्ट, बटुआ रख के पूजा न करे के चाहिँ.

९. गणेश भगवान के दुब (दूर्वा) चढावल जाला जवन बिना जड़ के, बारह अंगूरी लम्बा आ तीन गांठ वाला होखे के चाही। अइसन १०१ चाहे १२१ दूब (दूर्वा) से श्रीगणेश भगवान के पूजा करे के चाहीं, अइसन शिवमहापुराण में कहल बा.

१०. विष्णु भगवन के खुश करे खातिर पियर रेशमी कपडा चढ़ावे के चाहीं, माँ दुर्गा, सूर्य भगवान आ श्रीगणेश जी के लाल रंग के कपडा चढ़ावे के चाहीं, आ भगवान शिव के खुश करे खातिर उज्जर कपडा चढ़ावे के विधान बा।

११. भगवन शिव के हल्दी ना चढ़ावे के चाहीं ना हीं शंख से जल चढ़ावे के चाहीं। शाश्त्र के हिसाब से ई दुनू कर्म शिव भगवान के पूजा में मना बा। पूजा के अस्थान के रोज साफ करे के चाहिँ आ पूजा के अस्थान पर गन्दा कचरा जमा ना होखे एकर भी ध्यान रखे के चाहीं.

Leave a Reply