“વિકાસ પાગલ બની ગયો”
” विकास पागल हो गया ”
आजकल ये नारा  सोशल मीडिया में खूब चल रहा है अभी 2 महीने पहले इस नारे को कोई नहीं सुना था अचानक से ये नारा गुजरात सहित पूरे देश में प्लांट कर दिया गया है ,
आखिर क्या मकसद है इस नारे के पीछे ??
क्या ये नारा जनता का है या राजनीतिक लोगो ने अपने मकसद के लिए प्लांट किया है ?  गुजरात चुनाव को देखते हुए !

पहले चुनाव होते थे जाती धर्म के नाम पर अब जब मुख्य सत्ताधारी पार्टी विकास के नाम पर चुनाव लड़ और  जीत रही है तो विपक्षी ने ” विकास पागल हो गया ” मतलब विकास को पागल करार कर दिया है,  देशवासियों को याद होगा 2014 लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष  सोनिया  गाँधी जी दिल्ली के इमाम बुखारी के चौखट तक खुद चल कर गयी थी अल्पसंख्यक वोट के लिए सायद इसलिए की इमाम बुखारी अल्पसंख्यक  समुदाय में खासा प्रभाव रखते है, इनको मना लिया तो देश भर के मस्जिद में खबर पहुँच जाएगी और वोट मिल जायेगा , अल्पसंख्यक  समुदाय के लिए 5 या 7% आरक्षण का वादा भी करी थी ,


अब समय बदल गया है गुजरात चुनाव जीतने के लिए श्री राम को काल्पनिक बताने वाले लोग अब मंदिर मंदिर टीका चन्दन लगवा रहे है , ये सब हुवा इसलिए है क्योंकि अब बहुसंख्यक हो या अल्पसंख्यक दोनों ही समुदाय विकास के नाम  पर नेता चुन रहा है विकास के नाम पर सरकार चुन रहा है , दूसरा पहलु ये भी है की पहले अल्पसंख्यक ही संगठित होकर इमाम या मुल्ला मौलाना के कहने पर वोट करते थे , बहुसंख्यक वोट जाती में बनते थे अब ऐसा नहीं है  अल्पसंख्यक भी अब मुल्ला मौलाना के बातो में नहीं आते और न ही बहुसंख्यक जाती में बटना चाहता है सब संगठित होकर विकाश करने वाले नेता चुन रहे है

 

राहुल गाँधी जी का कोई हिर्दय परिवर्तन नहीं हुवा है ये मंदिर और भजन कीर्तन सिर्फ एक ढोंग मात्र है , टारगेट सिर्फ गुजरात चुनाव है अगर सच में हिंदूवादी छवि और पंडितो के वंसज होते तो केरला में इनके युथ विंग के कार्यकर्ता जो सरे आम गौ हत्या कर दिया उनको पार्टी में नहीं रखते  लेकिन वो उस समय कुछ नहीं बोले , मतलब केरला में अल्पसंख्यक  समुदाय मेजोरिटी में है तो गाय काटो गुजरात में हिन्दू मेजोरिटी में है तो मंदि र जाओ , कुल मिलकर राहुल गाँधी और उनकी पूरी टीम वोट के विकास के नाम पर गुजरातियों को पागल बना रहे है !

अब आते है मेन मुद्दा पर विकास पागल हो रहा , ये नारा गुजरात से दिया गया है , इन राजनीतिक अंधे को समझ में ही नहीं आया की गुजरात जैसे विकसित राज्य में इस तरह के नारा कितना कारगर होगा ,  आज अगर भारत के राज्यों का DGP का मैपिंग रैंकिंग में   गुजरात नंबर 5  पर है, इससे पहले महाराष्ट्र,  उत्तरप्रदेश, तमिलनाडु, और कर्नाटका है,
अगर भारत में मुख्य 10 गरीब  राज्यों  को देखे तो 1. छत्तीसगढ़ 2. झारखण्ड 3. मणिपुर 4. अरुणाचल प्रदेश 5. बिहार 6. ओडिशा 7. असम 8. मध्य  प्रदेश 9. उत्तर  प्रदेश 10. वेस्ट  बंगाल  का नाम आता है ,
गुजरात जहाँ  बिहार, बंगाल, ओडिशा,  असम जैसे राज्यों से मजदुर मजदूरी के लिए जाते है ! सरकारी नौकरी के लिए नहीं प्राइवेट कंपनी में जॉब के लिए जहाँ  बड़े बड़े औद्योगिक कल कारखाने लगे है देश भर से युवा, मजदुर जाकर अपने और अपने परिवार का पेट पाल रहा है,
जहाँ  हर गाओं में हर घर में बिजली कनेक्शन है ,

 

विपक्ष  GST और नोटेबंदी पर सरकार को घेर रही है जबकि नोटेबंदी के बाद ही उत्तरप्रदेश में चुनाव हुए थे विपक्ष को ये याद रखना चाहिए खासकर कांग्रेस को सिख लेने की जरुरत है पहले भी नोटेबंदी और सर्जिकल अटैक पर सरकार को घेरने का नतीजा देख चुका है इसलिए संभल कर चलने में ही बेहतर है,

जिन पार्टीदार आंदोलनकारी को लेकर चल रही है कांग्रेस उसका भी बैकग्राउंड देखना चाहिए कहा तक मजबूत है और कितने पाटीदार पटेल समाज आंदोलनकारी के साथ है ?

राहुल गाँधी  भूल जाते हैं कि साबरमती नदी का किनारा कांग्रेस के शासन में खाली पड़ा था, जिसे उसी बीजेपी सरकार ने ग्लोबल टूरिस्ट सेंटर बना दिया, जिसका वे मज़ाक उड़ा रहे हैं।

गुजरातियों को ये भी देखना चाहिए की जो राहुल अपने UPA के 10 साल में कभी गुजरात नहीं आया वो अचानक गुजरातियों के हितैसी कैसे  बन रहा है ये वोट की राजनीति नहीं है तो और क्या है ?

विकास पागल हो गया नारा उस स्टेट में दिया जा रहा है जहाँ लड़कियाँ 2 बजे रात में सड़क पर स्कूटी चला कर घर जा सकती है ,
विकास पागल का नारा वह दिया जा रहा है जहाँ 24 घाटे बिजली है , देश के हर स्टेट से कनेक्टिविटी है रेल हो या एयरलाइन,
विकास पागल वहां हुवा है जहाँ 2002 के बाद को सांप्रदायिक दंगे नहीं हुए
विकास पागल उस स्टेट में हुवा है  जिस देश के लोग पूरे भारत में व्यापार कर रहे है
गुजरात में विकास को पागल करने से बेहतर है कांग्रेस पार्टी और राहुल गाँधी को गुजरात के समान्तर कोई कांग्रेस शासित राज्य दिखाना चाहिए जो गुजरात से बेहतर विकाससील हो

ये विकास पागल हो गया का नारा दे दे कर गुजरातियों के मन में हजारों जवावो में कोई सवाल नहीं मिल रहा है ! (राहुल जी के स्टेमेंट के हिसस से )  चुनाव आते ही सारे विपक्षी राजनीतिक दल कह रहे है गुजरात में जो विकास हुवा है वो वहां की जनता ने खुद किया है बात सही है प्राइवेट सेक्टर में गुजरात में बड़े बड़े उद्योग प्राइवेट सेक्टर के लोगो ने किया है पर क्या प्राइवेट सेक्टर वाले बिना सरकारी सुविधा, कानून व्यवस्था के किसी राज्य में इन्वेस्ट करता है ?? अगर करता है तो  कहिये इन उद्योगपति को बिहार में इन्वेस्ट करे , आसाम और छत्तीसगढ़ जैसे नक्सलवादी वाले राज्य में इन्वेस्ट करे ? कोई करने को तैयार नहीं होगा क्योंकि यहाँ कानूनी सुरक्षा नहीं मिलता 24 घंटे बिजली नहीं मिलेगी और न ही सरकारी तंत्र ठीक से एक्टिव है , इसलिए व्यापारी इन्वेस्ट करते भी है तो उसमे सरकार का बड़ा योगदान होता है और व्यापारियों को गुजरात के लिए प्रेरित करने वाले पहले मुख्यमंत्री नरेंद्र भाई मोदी थे जिन्होंने वायब्रेट गुजरात बनाकर हजारों उद्योगपति को गुजरात में इन्वेस्ट करने पर मजबूर किया गुजरात आज एक सफल और विकाससील राज्य है उसमे NDA सरकार का योगदान अहम है राजनीतिक चलवाजी अलग बात है पर गुजरात की पहचान नरेंद्र मोदी से है बीजेपी से है इसमें किसी को सक नहीं होना चाहिए ,  राहुल गाँधी जी गुजरती जनता के मन में कोई भी जबाब का सवाल उत्पन्न करे पर गुजरात की पहचान बीजेपी है नरेंद्र भाई मोदी है !

 

 

 

 

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