बिहार के चम्पारण के प्रभाकर भाई बिहार से मुंबई पहुंचे फिल्मो में काम करने , सफलत नहीं मिली उलटे ठोकरे ही खानी पड़ी जिसके बाद कैसे कैसे तो पहुँच गए लैटिन अमेरिकन देश कोस्टा रिका . अगरबत्ती बेचे, घाटा हुआ और पैसा डुबाये, शादी बियाह भी किये उधरे, तलाक भी हो गया, भारत लौट गए .और फिर पहुँच गए वापस कोस्टा रिका . बॉडी बना के  लैटिन अमेरिकन फिल्म में हीरो बन गए हैं .

लैटिन अमेरिकन फिल्म में सफलता मिलने के बाद अब वो हिंदी और भोजपुरी में भी फिल्मे बना रहे है ..कुछ दिन पहले जब वो फिल्म के प्रचार के सिलसिले में पटना आये थे तब उन्होने कहा की उन्होंने खुद फिल्म स्क्रिप्ट लिखी है। साथ ही लीड रोल भी किया है। फिल्म का ऑरिजिनल नाम ‘एनरेडाडोसः ला कन्फ्यूजन’ है।

फिल्म का डायरेक्शन आशीष आर मोहन ने किया है। फिल्म में फाइटर स्कॉट भोजपुरी भाषा बोलते नजर आएंगे। उन्होंने कहा कि फिल्म की कहानी लियो पर बेस्ड है जो प्यार और दौलत के चक्कर में उलझा रहता है। एक डकैती के दौरान उसकी मुलाकात एना नाम की लड़की से होती है, धीरे-धीरे दोनों में इश्क हो जाता है। फिल्म की शूटिंग कोस्टारिका में की गई है।

पटना के सेंट्रल स्कूल से 10वीं तक की पढ़ाई करने वाले प्रभाकर के माता पिता ग्रामीण बैंक में मैनेजर थे ..जब उन्होने बॉलीवुड में एक्टिंग के बारे में सोचा था तो वे मनोज वाजपेयी के पिता के पास पहुंचे थे।फिर प्रभाकर ने उनसे एक लेटर लिखवाया और उसे लेकर बॉलीवुड के कई डायरेक्टर्स और प्रोड्यूसर्स के पास पहुंचे, लेकिन सभी ने मना कर दिया। जिसके बाद बिज़नेस के सिलसिले में लैटिन अमेरिका के कोस्टारिका पहुंच गए। वहां उन्होंने मुल्तानी मिट्टी, अगरबत्ती और लकड़ी बेचना शुरू किया।फिर टेक्सटाइल बिजनेस में कदम रखा और उसके बाद फिल्म वितरण में। फिर प्रभाकर ने कोस्टारिका में बॉलीवुड की पांच-छह फिल्में रिलीज करवाई। उन्होंने साल 2006 में लैटिन अमेरिका में अक्षय कुमार की फिल्म ‘गरम मसाला’, ‘कहो न प्यार है’, ‘बनारस’ जैसी फिल्म रिलीज की। उस समय वे 20-25 लाख रुपए में फिल्में खरीदते थे, जबकि आमदनी 2 से 3 लाख तक ही होती थी।

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