अमृतेश कुमार रंजन
अमृतेश कुमार रंजन

 

आपलोगों ने निश्चित ही बहुत सारे उपन्यास पढ़े होंगे. आपने चेतन भगत, दुर्जोय दत्ता जैसे लेखकों को भी ज़रूर पढ़ा होगा. पर मेरा ये विनम्र दावा है की हाल के दिनों में आपने ठेठ बिहार के गवई भाषा के साथ साथ हिन्दी और इंग्लीश का रीमिक्स लिए बहुत ही रोचक तरीके से लिखे गये , बिहारी लेखक का उपन्यास शायद ही पढ़ा होगा. और यदि पढ़ा भी होगा तो संभव है की वो वही उपन्यास हो,जिसके बारें में हम बात करने जा रहें हैं. हम बात कर रहें हैं A dead love story alive on facebook की. 

प्रिंट मीडीया और देश भर के विभिन्न अख़बारों में पहले से ही अपने उपन्यास के माध्यम से सुर्खिया बटोर चुके अमृतेश उर्फ अमृतेश कुमार रंजन आज किसी परिचय के मोहताज़ नहीं हैं. जब हमनें उनसे साक्षात्कार का आग्रह किया तब वो सहर्ष तैयार हो गये. आप भी पढ़िए उनके विचार और उनसे हुई हमारी बातचीत.

 

 

Bihar Chaupal:  सबसे पहले तो बिहार चौपाल आपका बहुत बहुत धन्यवाद करता है कि आपने अपने व्यस्त कार्यक्रम से भी हमारे और हमारे सभी पाठकों के लिए समय निकाला. आपका चर्चित उपन्यास A dead love story alive on facebook हमने भी पढ़ा है…ये कहानी सबको कहीं ना कहीं से अपनी कहानी सी लगती है…तो क्या ये आपकी अपनी जीवन की कहानी भी है? 😉
Amritesh : सबसे पहले तो बिहार चौपाल के मंच पर मुझे आमंत्रित करने के लिये बिहार चौपाल के सभी सदस्यों को तहे दिल से धन्यवाद और प्रणाम और अपना भोजपुरिया स्टाइल में बोली तो “सभे केहू के राम राम ,बड़ बुजुर्ग के गोड़ लागिले “और बिहार चौपाल के माध्यम से सभी पाठकों का धन्यवाद ,प्रिंट मीडिया ,ऑनलाइन मीडिया सभी को तहे दिल से धन्यवाद जिन्होंने मुझे इतना प्यार दिया ,जिनकी वजह से मुझे थोड़ी बहुत पहचान मिली।अपने उपन्यास के बारे में बताने से पहले अपने बारे में थोड़ा बता देता हूं चूँकि मेरा नाम सबके लिये आश्चर्य का विषय रहता है तो बता दूं कि मेरा ऑफिसियल नाम अनिल कुमार है लेकिन दोस्तो और घर में अमृतेश कुमार रंजन नाम ज्यादा प्रयोग होता है,इसलिये फेसबुक पर मुझे सभी पहचान सके, मैने अपने दोनों नाम को जोड़ कर -“अमृतेश अनिल रंजन” रख लिया है.

मैं एक B.Tech Engineer हूँ और अभी TCS kolkata में कार्यरत हूँ ।अगर बात करें  इस उपन्यास की तो बिल्कुल इसे इस तरीके से लिखी ही गयी है ताकि ये कहानी सबकी अपनी कहानी लगे ,हर उस मध्यमवर्गीय परिवार की अपनी कहानी लगे ,हर उस युवा की अपनी कहानी जो मध्यमवर्गीय परिवार में पला बढ़ा हो,खासकर बिहारी युवा को ये कहानी पूरी तरह अपने दिल के करीब लगती है ,और जहां तक इस कहानी की मेरे जीवन से जुड़ाव की बात है तो बिल्कुल मैं भी एक मध्यवर्गीय परिवार से हूँ ,और लगभग हर लेखक की पहली किताब कहीं ना कहीं अपने जीवन से जरूर जुड़ी होती है . जब मैंने कहानी लिखनी शुरू की तो बस मेरे दिमाग मे एक ही बात थी की जो उसमे कैरक्टर हो वो खासकर 90 के दशक के हर युवा का प्रतिनिधित्व करता हो क्योंकि सभी को वही कहानी अच्छी लगती है जो उनके जीवन से जुड़ी हो ताकि किसी डायलॉग को पढ़ते समय पाठक के मुंह से निकल पड़े “अरे अइसन तो हमारे साथ भी हुआ है” 😂😀

Bihar Chaupal : आप मुख्य रूप से बिहार से हैं और कहानी की पृष्ठभूमि भी बिहार की ही है. आज के ऐसे समय में जब चेतन भगत और दुर्जोय दत्ता जैसे लेखक अपनी कहानी ज़्यादातर शहरों की पृष्ठभूमि में लिखते हैं और ख़ासे कामयाब भी रहे हैं,फिर भी आपने अपने कहानी में अपने प्रदेश की पृष्ठ भूमि को लिया,इसके लिए आप बधाई के पात्र हैं, पर क्या हमें बताना चाहेंगे कि बिहारी पृष्ठभूमि से आपके किताब को ख़ास फ़ायदा हुआ?
Amritesh: चूंकि मेरा जन्म मोतिहारी से सटे एक छोटे से गांव में एक किसान परिवार में हुआ है और पूरा बचपन गांव में ही गुजरा है .इस कहानी में मुझे वो सारी चीजें दिखानी थी जो एक मध्यमवर्गीय परिवार के युवा के साथ गुजरता है,और खासकर बिहार का दिल सिर्फ गांव में बसता है .और आज भी जो शहरों में रहते है वो कही न कही गाँव से ही जुड़े हुए है.  आज कल युवाओ के लिये जो भी कहानी लिखी गई है वो शहरों से जुड़ी हुई ज्यादा है लेकिन गांव के नाम पर बस प्रेमचन्द जैसे महान लेखकों की किताबें याद आती है .लेकिन उस जमाने में और अब के जमाने के गांव में बहुत फर्क आया है. उस बदले हुए गांव को भी दिखाया जाए .अगर सभी शहरों के लिये लिखने लगेंगे तो फिर गांव को अपनी कलम में कौन जिंदा रखेगा ?सबसे खास बात ये है कि इस कहानी को मूल रूप से हिंदी, इंग्लिश और भोजपुरी में लिखी गई है जो बिहार को खुद में समाहित करती है ।

 

 

Bihar Chaupal : आपका यह उपन्यास क्या किसी ख़ास वर्ग को ध्यान में रख कर लिखा गया है?
Amritesh : सिर्फ खास वर्ग के लिये तो नही कह सकता हूँ ,हां आज के युवाओं जो 90 के दशक में पले बढ़े हैं उन पर फोकस ज्यादा जरूर है . लेकिन अगर कोई माँ इस कहानी को पढ़ेगी तो खुद को इसमें देख पाएगी …एक पिता अगर पढ़ता है तो खुद को इसमें महसूस कर पाए…अगर शिक्षक पढ़े तो खुद को इसमें देख पाएंगे ,जैसे बचपन की उन सारी nostalgic घटनाओ का जिक्र है कि कैसे हम 90 के दशक में खेला करते थे ,कैसे दूरदर्शन पर फिल्में देखा करते थे ,कैसे स्कूल जाया करते थे . फिर ऐसे छात्र जो दसवीं तक पढ़ने में खुद को होशियार समझते हैं,स्कूल टॉप भी करते हैं लेकिन जब वो IIT जैसे कठिन परीक्षाओ का सामना करते हैं और जब वो क्रैक नहीं कर पाते तो वो बिखर से जाते हैं ,क्योंकि 10वीं तक की पढ़ाई थ्योरीटिकल होती है जबकि IIT न्यूमेरिकल पर फोकस होता है. बोर्ड को फेस करने में और कम्पटीशन को फेस करने में जमीन आसमान का फर्क नजर आने लगता है . और आप तो जानते ही होंगे इसकी वजह से कोटा में हर साल कितने छात्र आत्महत्या करते हैं . इसलिये इस कहानी में मैने पटना और कोटा के छात्रों के जीवन से रु बरु करवाया है कि छात्र आत्महत्या क्यों करते हैं . पटना एजुकेशन हब होते हुए भी वहां की स्थिति बेहद खराब क्यों है या यू कहें कि बिहार की स्थिति खराब क्यों है ?इन सारी परिस्थितयो को मैने दिखाया है।

Bihar Chaupal : जब आपने यह उपन्यास लिखा तब आप एक विद्यार्थी थे. आपने किस प्रकार लेखनी और पढ़ाई का एक साथ प्रबंधन किया?
Amritesh: बहुत ज्यादा टाइम मैनेज करना पड़ा . सबसे ज्यादा दिक्कत तब आई जब सेमेस्टर एग्जाम भी चल रहा होता था उसकी तैयारी करनी होती थी, दूसरी तरफ दिमाग मे ये चल रहा होता था कि स्टोरी को और कैसे बेहतर बनाया जाए एक सबसे बड़ा ट्रेजेडी तब हुआ था जब इस उपन्यास का विमोचन होने वाला था . मोतिहारी में ही विमोचन की 1 जनवरी तारीख तय हो चुकी थी . लेकिन 29 दिसंबर को सेमेस्टर एग्जाम खत्म हो रहे थे. मुझे लगा एग्जाम खत्म होते ही घर चला जाऊंगा ,पब्लिशर ने भी वादा कर दिया था कि लॉन्चिंग कॉपी आपके पास समय से पहुँचा दी जाएगी , लेकिन अंत समय में वहां से कॉल आया कि एडिटिंग अभी पूरी नही हुई है और मैंने अपनी मर्जी से जो कवर डिज़ाइन जो करवाया था वो कम्पलीट नही हुआ है.  अब तो मेरे होश उड़ गए कि मैं घर जाऊं या दिल्ली जाऊं अंतिम एग्जाम दूं? फिर मेरे रूममेट्स अपूर्व तेजस्वी और हेमन्त तीनो ने मिल कर हौसला दिया,टिकट का इंतजाम किया और जैसे ही एग्जाम खत्म हुआ तीनो स्टेशन छोड़ आए . भोपाल से दिल्ली पहुँचा वहां रात भर खुद से करेक्शन करवाया.  चार घण्टे में किताब छपी फिर उसी रात अमेज़न ,फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हुई,तब लॉन्चिंग कॉपी लेकर अपने घर पहुँचा ।

 

 

Bihar Chaupal : आज कल हर नवोदित लेखक की कहानी प्रेम संबंधो पर आधारित होती है. ” A dead love story alive on facebook ” किस प्रकार से उनसे अलग है?
Amritesh: नाम से ही प्रतीत होता है कि ये कहानी फेसबुक से कही न कही जुड़ी हुई है ,और पुराने जमाने की प्रेमकहानी प्रेमपत्रों से शुरू हुआ करती थी.  आजकल सोशल मीडिया से शुरू हुआ करती है. इस कहानी से युवाओं को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा कि क्या सही है क्या गलत है . हमारे बिहार में जाति प्रथा उफान पर रहती है और यहां अंतरजातीय विवाह बहुत बड़ी समस्या है. उसपे फोकस किया गया है जबकि जातिवादी रूढ़िवादी विचार धारा को कम करने में इंटरकास्ट मैरिज बहुत मदद कर सकती है . इसमें बहुत ही ज्यादा कॉमेडी है …दोस्तो के बीच की बकैती ऐसा लगेगा जैसे आप अपने दोस्तों के साथ मजे कर रहे हैं, एक सस्पेंस थ्रिल भी है जो अब तक के सबसे बड़े घोटाले में शुमार व्यापम घोटाले को कनेक्ट करती है. एक खास बात ये है कि इसे आजकल के युथ की अपनी भाषा में लिखी गई है ।
Bihar Chaupal : ऐसा कहा जाता है की हर इंसान के पास एक कहानी होती है. क्या आप कोई सलाह देना चाहेंगे की कैसे किसी कहानी को एक रोचक उपन्यास की सकल दी जा सकती है?
Amritesh: बिल्कुल! आजकल अधिकतर वास्तविक कहानी ही उपन्यास का रूप ले रही है और आजकल लोग फिक्शन से ज्यादा रियल पढ़ना पसन्द करते हैं इसलिये किसी की भी कहानी अगर अच्छी हो और उसके लिखने का तरीका रोचक और नया हो तो वो उपन्यास का रूप ले सकती है ।
Bihar Chaupal : यदि नये लेखक अपनी कहानी को प्रकाशित करवाना चाहें तो उसके लिए क्या प्रक्रिया है?
Amritesh: सबसे पहले अपनी कहानी तैयार करें,  उसके सारांश को और कुछ भाग को पब्लिशर को ईमेल करें .उन्हें अगर पसन्द आती है तो वो रिप्लाई करेंगे।
Bihar Chaupal : क्या उपन्यास लेखन एक करियर का विकल्प हो सकता है? क्या केवल उपन्यास लिख के जीवन यापन किया जा सकता है?
Amritesh: हो सकता है . चेतन भगत जैसे लेखक उसके उदाहरण तो हैं ही लेकिन मुझे व्यकितगत तौर पर खासकर हिंदी लेखकों को लेखनी पे पूरी तरह निर्भर होना सही नही लगता है ,क्योंकि आजकल हर कोई लिखना चाहता है …पढ़ना कोई नही चाहता तो रीडर कम हो रहे हैं,  लेखक ज्यादा हो रहे हैं. दूसरी बात ,इंग्लिश की डिमांड अभी भी बहुत ज्यादा है .लेकिन इस कहानी के जरिये मैने हिंदी को कूल बनाने की कोशिश की है ताकि इससे वो युवा जुड़ सकें जो बुक स्टाल पर जा के सिर्फ इंग्लिश नॉवेल के बारे में पूछते हैं,वो एक बार सिर्फ पन्ने को खोले तो सही ,दो लाइन पढ़े तो सही ,अगली बार ऐसे कूल हिंदी किताबो के बारे में भी जरूर पूछे ।

 

Bihar Chaupal : आमतौर पर ये देखा जाता है की जब कोई व्यक्ति सफल होता है तो उसके पीछे किसी ना किसी की प्रेरणा होती है. क्या आपकी भी कोई प्रेरणा है?
Amritesh: हां , इस कहानी को लिखने में सबसे बड़ी प्रेरणा एक लड़की थी जो कभी मेरे जीवन के एक छोटे से हिस्से में थी .मेरे शिक्षक अमरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव जिन्होंने बचपन से मेरी बहुत ज्यादा मदद करते रहे हैं उन्होंने काफी प्रोत्साहित किया .मेरे रूम मैट्स अपूर्व ,तेजस्वी ,हेमन्त ,मेरे मम्मी पापा ,मेरी बहन सबने काफी प्रोत्साहित किया ।
Bihar Chaupal : आप अभी कुँवारे हैं, और जब कोई व्यक्ति इस तरह के प्रेम आधारित कहानी लिखता है तो परिवार को बताने में झिझक होती है. क्या आपने भी कोई इस तरह की समस्या महसूस की?
Amritesh: झिझक महसूस तो हुई लेकिन मैं अपने मम्मी पापा घरवालो से बहुत ज्यादा फ्रेंडली हूँ इसलिये उतनी भी दिक्कत नही हुई ।
Bihar Chaupal : क्या आप नये लेखको को कोई संदेश देना चाहेंगे?
Amritesh: जो भी लिखे दिल से लिखे और जितना ज्यादा लैंग्वेज को रोचक बनाना चाहे ,जितना ज्यादा लिखने के तरीके को रोचक बनाना चाहे उसे करने की कोशिश करे ।
Bihar Chaupal : आपका यह उपन्यास ख़ासा सफल रहा है…क्या आप इसका अगला भाग भी लिख रहे हैं. यदि हाँ तो कब तक वो उपलब्ध होगा?
Amritesh: हाँ जैसे कि मैंने बताया कि ये कहानी व्यापम घोटाले को कनेक्ट करती है ,लेकिन वो अधूरी है.  उसमे जो सस्पेंस है वो अधूरा है,तो जाहिर सी बात है इसका अगला भाग भी है जिसपे मैं काम कर रहा हूँ।

Bihar Chaupal : बिहार चौपाल की तरफ से आपको बहुत बहुत धन्यवाद और नये उपन्यास के लिए ढेर सारी शुभकामनायें.

आप उनका उपन्यास फ्लिपकार्ट और आमज़ॉन से ऑर्डर कर सकते हैं

 

 

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