एशिया के सबसे बड़े मीठे पानी का झील कांवर झील के दिन फिरने के आसार हैं। गर्मियों के दिनों में देश विदेश से यहाँ क़रीब 60-100 प्रजाति की पक्षियाँ अपना बसेरा बनाती थी . लेकिन धीरे धीरे लोगो ने अतिक्रमण करना शुरू किया जिससे झील का आकार और गहराई तेजी से सिकुड़ती गई है। वही कुछ लोगो ने चंद पैसे के लिए पक्षियों को ही मारना शुरू कर दिया जिससे पक्षी भी बहुत कम संख्या में आने लगे .. अब ना तो झील वैसा है और ना पक्षी आते है .

लेकिन न्यूज़ 18 इंडिया के अनुसार , बिहार के तत्कालीन राज्यपाल और अब देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द के कांवर झील पक्षी अभयारण्य को लेकर किये गये वायदों पर रंग चढ़ने लगा है. दरअसल, इसी साल मई महीने में आयोजित जयमंगला काबर महोत्सव में बतौर मुख्य अतिथि तत्कालीन राज्यपाल रामनाथ कोविन्द का बेगूसराय के मंझौल आए थे, जहां उन्होंने जयमंगला काबर फाउंडेशन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर काबर समस्या के निदान के लिये मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बात करने का भरोसा दिलाया था.

कार्यक्रम के ठीक अगले ही दिन रामनाथ कोविन्द ने मुख्यमंत्री से बातचीत की और काबर समस्या के निदान के लिये आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए. महामहिम रामनाथ कोविंद की पहल का असर हुआ और बिहार सरकार ने विकास आयुक्त शिशिर सिन्हा की अध्यक्षता में एक कमिटी का गठन किया है.इस कमिटी में वन और पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव त्रिपुरारी शरण,प्रधान मुख्य वन संरक्षक बिहार,निदेशक,पारिस्थिकी एंव पर्यावरण समेत 6 अधिकारियों को शामिल किया गया है.

नवगठित कमिटी 1 दिसंबर को काबर ताल पक्षी अभ्यारण्य का दौरा करने आ रही है,जो किसानों और मछुआरों समेत सभी पक्षकारों के साथ वार्ता करेगी. कमिटी के एजेंडे में काबर झील के नोटिफिकेशन में विसंगतियों को खत्म कर एक नया समाधान निकालना शामिल है.

जयमंगला काबर फाउंडेशन के अध्यक्ष राजेश राज ने बिहार के तत्कालीन राज्यपाल रामनाथ कोविन्द और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति शुक्रिया करते हुए आम नागरिकों और बुद्दिजीवियों से अपील की है कि 1 दिसंबर को दोपहर में जयमंगलागढ़ में कमिटी के समक्ष लोगों को शिरकत करें और साथ ही एकंबा, परोड़ा, कुँभी, सकरबासा,नारायणपीपड़,खांजहांपुर,छौड़ाही समेत चेरियाबरियारपुर के अनेक प्रभावित गांवों और बखरी विधानसभा के गढ़पुरा,नावकोठी के विभिन्न गांवों के लोगों को अपनी समस्याओं से रुबरु कराने के लिए आगे आएं.

 

जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी रोक को हटाने और मंझौल की आबादी वाली जमीन और खेती योग्य जमीन को किसानों को वापस करने का प्रस्ताव जयमंगला काबर फाउंडेशन ने कमिटी के समक्ष रखने का मन बनाया है. साथ ही मछुआरों की एक बड़ी आबादी का भी ख्याल रखे जाने का प्रस्ताव है. कमिटी के आगमन की खबर से काबर के किसानों में एक लंबे अंतराल के बाद आस जगी है.

वही उम्मीद है की इस पहल से कांवर झील के भी अच्छे दिन आयेंगे .

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